बरेली : स्वर्ण पदक और प्रमाणपत्र पाकर खिले टॉपर्स के चेहरे

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Edited By Pradeep Kumar
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 23वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 94 टॉपर्स को पदक दिए

बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का 23वां दीक्षांत समारोह उल्लास के साथ मनाया गया। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 94 टॉपर्स को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र और 111 शोधार्थियों को उपाधि प्रदान कीं। इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भी दिया। इसके अलावा रितु उपाध्याय को हस्तशिल्प में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया गया।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में गुरुवार को सुबह 11:23 मिनट पर शोभायात्रा निकलने के बाद समारोह की शुरुआत हुई। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने दीक्षांत उद्बोधन में कहा कि वर्ष 2024-25 में रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। विश्वविद्यालय को नैक ए डबल प्लस के साथ यूजीसी की श्रेणी-1 का दर्जा प्राप्त है। पीएम उषा परियोजना के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये और एएनआरएफ-पेयर (अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन-पार्टनशिप फॉर एक्सिलिरैटेड इनोवेशन एंड रिसर्च) परियोजना के अंतर्गत 10 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय ने समर्थ पोर्टल को अपनाया है। उन्होंने कहा कि आनंदीबेन पटेल के कुलाधिपति बनने से पहले राज्य का कोई भी विश्वविद्यालय नैक में अच्छी रैंक पर नहीं था। अब 8 ए डबल प्लस, 3 ए प्लस, 2 ए ग्रेड हैं। इसके अलावा एनआईआरफ व अन्य रैंकिंग में भी स्थान पाया है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के 205 पेटेंट फाइल हुए हैं। विश्वविद्यालय ने 17 देशों से एमओयू हुए हैं। यूपी के आवासीय विश्वविद्यालयों में सबसे पहले रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने ब्लॉक चेन सिस्टम से विद्यार्थियों की डिग्री, मार्कशीट एवं शैक्षणिक दस्तावेजों को अपलोड किया है। आज 1,15,596 छात्र-छात्राएं, जिनमें 70782 छात्राएं और 44,814 छात्राएं का रिकार्ड ब्लॉक चेन में अपलोड किया गया। सत्र 2024-25 के लिए 44 विषयों में 110 पीएचडी पूर्ण कराए गए हैं। अब तक 1748 पीएचडी थीसिस शोध गंगा वेबसाइट पर अपलोड की गई हैं। विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने इस वर्ष राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 26 स्वर्ण, 20 रजत और 11 कांस्य पदक प्राप्त किए हैं।

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विकसित देश के बारे में छात्रों को सोचना चाहिए : प्रो. राजीव आहूजा
समारोह के मुख्य अतिथि आईआईटी रोपण, पंजाब के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा कि आईआईटी में दीक्षांत एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। यह बहुत जरूरी है। यहां से विद्यार्थी अलग-अलग क्षेत्र में जाते हैं। उन्होंने कहा कि आईआईटी अच्छा इसलिए करते हैं, क्योंकि उनके पूर्व छात्र शामिल होते हैं। विश्वविद्यालय के छात्रों को भी अपने साथ विश्वविद्यालय के बारे में सोचना चाहिए कि यह कैसे आगे बढ़े और देश कैसे आगे बढ़े, तभी विकसित भारत बन सकेगा। आप 2047 में कैसा देश देखना चाहते हैं, इसका श्रेय आपको ही लेना होगा। यूजीसी कैटेगरी 1 में आईआईटी रोपण और रुहेलखंड विश्वविद्यालय दोनों शामिल हैं। कुल 10 करोड़ की ग्रांट मिल रही है। इसका उपयोग अच्छी प्रयोगशालाएं, लाइब्रेरी एवं संसाधनों को जुटाने में किया जाए जिससे अच्छे शोधार्थी और सुविधाएं उत्पन्न हो। कभी अपने माता-पिता और गुरुओं को नहीं भूलना चाहिए। छात्रों को सिर्फ सरस्वती की पूजा करनी चाहिए, लक्ष्मी अपने आप मिल जाएगी। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में विदेशी छात्र आ रहे हैं, यह अच्छी बात है।

दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि माता-पिता और गुरुओं को न भूलें टॉपर
दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने उपाधि और पदक हासिल करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने माता-पिता और गुरुओं को कभी न भूलें। उनके श्रम और परिश्रम के बिना ये संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि दीक्षांत का मतलब शिक्षांत नहीं, बल्कि दीक्षांत एक नए जीवन की शुरुआत है। आप अपना लक्ष्य निर्धारित कर शिखर पर पहुंचना चाहेंगे, ये उसकी नींव है। शिक्षा से जो संस्कार मिलते हैं, उनसे ही व्यक्ति का निर्माण होता है और उसी से समाज का निर्माण आपको करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद संस्कारयुक्त शिक्षा की बात करते थे।

कोरोना काल में डॉक्टरों ने जो किया वह एक उदाहरण है। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाई। मगर वो कौन सी शिक्षा है जो डॉक्टरों को आतंकी बनाती है। शिक्षा मानवता की रक्षा के लिए होती है, दानव बनाने के लिए नहीं होती। वो कौन सी शिक्षा है जो बच्चों के हाथ में कलम नहीं देती बल्कि पत्थर देती है। वो कौन सी शिक्षा है जो बच्चों के हाथ में कंप्यूटर नहीं बम देती है। हमें इससे कैसे निजात मिले इसका संकल्प लेना होगा। शिक्षा वो है जो ज्ञान-विज्ञान सिखाए, शिक्षा वो है जो स्वावलंबी बनाए। मगर आज जो शिक्षा कुछ लोगों को मिल रही है उन्होंने अपने लिए ज्ञान विज्ञान के दरवाजे बंद कर लिए हैं। केवल एक पुस्तक से शिक्षा नहीं मिलती।

सरदार वल्लभ भाई पटेल से हमें शिक्षा मिलती है कि राष्ट्र की एकता के लिए हमें समर्पित रहना चाहिए। बिरसा मुंडा के आदर्शों से हमें शिक्षा मिलती है। वंदेमातरम केवल गीत नहीं बल्कि एक उद्घोष था जो मानव जाति को चेतना देता था। हमें ऐसे संस्कार चाहिए जो हमें हमारे देश के प्रति समर्पित करें। राज्यपाल इस बात का उदाहरण हैं, वह चाहतीं तो राज्यपाल बनकर आराम कर सकती थीं। मगर उन्होंने यूपी में शिक्षा का स्तर ऊंचा करने पर फोकस किया। इससे पहले हम कहीं स्थान नहीं रखते थे, आज देश भर के सर्वाधिक ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में हैं।

70 फीसदी बेटियां पदक ले रहीं, यही बदलता भारत : रजनी तिवारी
अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आप ऐसे समय में डिग्री ले रहे हैं, जब देश अमृत काल मना रहा है। आप भविष्य में देश के लिए कुछ करें। 70 फीसदी बेटियां पदक ले रही हैं, यही बदलता भारत है। उन्होंने महिला क्रिकेट विश्वकप जीतने का जिक्र करते हुए बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से भी प्रेरणा लेने को कहा।

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