योगी सरकार का बड़ा फैसला... 10 साल तक की किरायेदारी पर स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन शुल्क में मिली बड़ी छूट

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री से नहीं होंगे विवाद, योगी कैबिनेट का किरायेदारी को सरल व पारदर्शी बनाने का बड़ा फैसला

लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश सरकार ने किरायेदारी व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और विवाद मुक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 10 वर्ष तक की अवधि वाले किरायानामा विलेखों पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री फीस में व्यापक छूट को मंजूरी दे दी है। यह फैसला उन मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक शुल्क अधिक होने के कारण किरायानामा रजिस्टर्ड कराने से बचते थे।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान नियमों में एक वर्ष से अधिक अवधि की किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री अनिवार्य है, लेकिन अधिकतर किरायानामे मौखिक रहते हैं या रजिस्ट्री नहीं कराई जाती। बाद में ऐसे मामलों में विभागीय जांच में कमी स्टाम्प शुल्क की वसूली करनी पड़ती है। सरकार का मानना है कि उच्च शुल्क लोगों को कानूनी रूप से रजिस्ट्री कराने से रोकता था, जिसके कारण विवाद बढ़ते थे।

नई व्यवस्था में अवधि और औसत वार्षिक किराए के आधार पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री फीस की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है। अब किरायेदारी विलेख पर निश्चित शुल्क से अधिक वसूली नहीं होगी, जिससे किरायेदार और मकान मालिक दोनों सुरक्षित रहेंगे और किरायेदारी विनियमन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन होगा। सरकार ने टोल और खनन पट्टों को इस छूट से बाहर रखा है, ताकि राजस्व हानि न हो। यह कदम राज्य में किराया व्यवस्था को औपचारिक बनाने, विवाद रोकने और आम जनता को सहज व सस्ती रजिस्ट्री सुविधा देने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

निर्धारित अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रीकरण फीस

औसत वार्षिक किराया 2,00,000 रुपये तक: 1 वर्ष तक 500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 1500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 2000 रुपये

औसत वार्षिक किराया 2,00,001 से 6,00,000 रुपये तक: 1 वर्ष तक 1500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 4500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 7500 रुपये

औसत वार्षिक किराया 6,00,001 से 10,00,000 रुपये तक: 1 वर्ष तक 2500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 6000 रुपये, 5 से 10 वर्ष 10000 रुपये।

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