दिल्ली धमाका : नेपाल से खरीदे गये थे सात मोबाइल, जानिये क्यों स्पेशल सेल की टीम ने कानपुर में डाला डेरा

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Edited By Amrit Vichar
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कार्यालय संवाददाता, कानपुर, अमृत विचार : दिल्ली धमाके में डॉ. शाहीन और उसके भाई डॉ. परवेज का कनेक्शन जुड़ने से सुरक्षा एजेंसियों कानपुर से लखनऊ के बीच लोगों की तलाश तेज कर दी है। दिल्ली स्पेशल सेल की एक यूनिट कानपुर के कैंट इलाके में डेरा जमाए है। यूनिट कमिश्नरेट पुलिस को बिना कोई जानकारी दिए ऑपरेशन चला रही है। एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार डीएम कार्डियोलॉजी छात्र डॉ. आरिफ समेत पांच लोग धमाके से एक घंटे पहले तक डॉ. मुजम्मिल के संपर्क में रहे। जिन मोबाइल का उपयोग हुआ, नेपाल से सेकेंड हैंड खरीदे गए थे। उनमें 17 सिम का प्रयोग हुआ, जिसमें छह कानपुर से खरीदे गए थे। सिम के लिए लखनऊ की भी आईडी का इस्तेमाल हुआ है। दो आईडी बेकनगंज की भी मिली हैं। जिसके आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने उस आईडी के पड़ताल के लिए अपना नेटवर्क खोला है। टीम का ऑपरेशन देर रात से सुबह भोर पहर तक चलता है। 

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार बिस्फोट से एक घंटा पहले तक डीएम कार्डियोलॉजी छात्र डॉ. आरिफ, शाहीन का भाई डॉ. परवेज, डॉ. फारुख अहमद और दो अन्य डॉ. मुजम्मिल के संपर्क में थे।  डॉ. शाहीन भी आठ नवंबर की सुबह करीब 10 बजे तक उसके संपर्क में रही। आमीन और इंशा अल्लाह जैसे मैसेज मोबाइल में मिले हैं। दिल्ली की स्पेशल टीम को डॉ. परवेज की ससुराल में ताला बंद मिला है, जबकि बेकनगंज में कपड़ा दुकानदार उनके साले उस्मान से छह घंटे तक पूछताछ हुई। सूत्रों के अनुसार उस्मान ने किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया है। फिर भी स्पेशल सेल ने उसकी फैमिली हिस्ट्री का ट्री बनाया है। सूत्रों के अनुसार डॉ. परवेज कानपुर आता तो अपने दोस्तों से मिलने कर्नलगंज, जीएसवीएम और मंधना पहुंचता था। बाबूपुरवा में भी उसके दोस्तों के होने की जानकारी स्पेशल टीम को मिली है। वहीं डॉ. आरिफ व डॉ. परवेज भी संपर्क में थे। जबकि अक्टूबर में डॉ. शाहीन कानपुर में देखी गईं।

भाई-बहन के नेटवर्क में शामिल स्लीपर सेल्स की तलाश 

बिस्फोट के बाद सुरक्षा एजेंसियों को पता चला कि कानपुर की डॉ. शाहीन व लखनऊ का उसका भाई डॉ. परवेज को धमाकों की जानकारी थी। उसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां भाई-बहन का नेटवर्क तोड़ने, उजागर करने और नेटवर्क में शामिल स्लीपर सेल्स की तलाश में जुटी हैं। भाई-बहन के मोबाइल से कानपुर से लेकर लखनऊ तक का नेटवर्क सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यूपी के जिन जिलों में नेटवर्क की गतिविधि थी, वहां के स्लीपर सेल्स अंडरग्राउंड हो गए हैं। नेपाल के रास्ते भागने की बात भी सामने आई है। 

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