Pilibhit: तो फिर तेंदुए की मौत के पीछे शिकार...एक पंजा मिला गायब
पीलीभीत, अमृत विचार। बरखेड़ा क्षेत्र के गांव में मृत मिले तेंदुए की मौत की वजह भले ही पोस्टमार्टम होने के बाद भी पता नहीं चल सकी, लेकिन तेंदुए के शरीर में मिले घाव और गायब पंजा कहीं न कहीं शिकार की घटना की ओर इशारा कर रहा है। माना जा रहा है कि तेंदुआ शिकारी द्वारा लगाए गए फंदे में फंसा होगा और खुद को फंदे से निकालने की जद्दोजहद में अपने पंजे को बुरी तरह जख्मी कर बैठा। हालांकि जिम्मेदार इस मामले में कुछ भी बोलेने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों समेत अन्य वन्यजीवों के साथ तेंदुओं की संख्या में तेजी से बढ़ी। कहने को तो तेंदुए कहीं अधिक फुर्तीला वन्यजीव बताया जाता है, मगर बाघों के बादशाहत वाले जंगल में तेंदुआ अकसर वर्चस्व की जंग हारकर जंगल छोड़ आबादी की ओर रुख रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो जंगल छोड़ने वाले अधिकांश तेंदुए जंगल और आबादी के बीच रहना पसंद करते हैं। मगर, इन सबके बीच बेघर हुए इन तेंदुओं की जान को खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। बीते साल से अब तक के आंकड़ों पर नजर डाले तो अब तक चार तेंदुओं की मौत सड़क हादसों में हो चुकी है।
वहीं पिछले करीब दो माह से तेंदुओं के फंदे में फंसने की घटनाओं में तेजी आई है। बीते 26 सितंबर को कलीनगर तहसील क्षेत्र में नगरिया कट के पास फंदे में फंसे तेंदुए को जैसे-तैसे रेस्क्यू किया गया था, मगर रात में ही तेंदुए की मौत हो गई। इस तेंदुए की मौत इंफेक्शन से होना बताया गया। बीते 01 नवंबर तो शहर से लदपुरा के पास से एक तेंदुआ रेस्क्यू किया गया। यह तेंदुआ भी शिकारियों द्वारा लगाए गए फंदे में फंसा पाया गया था। इधर एक दिन पूर्व बरखेड़ा क्षेत्र के गांव पिपरा खास में तालाब के किनारे एक बेसुध तेंदुआ मिला। ग्रामीणों की मानें तो तेंदुआ कुछ देर पहले छिपने के बजाए चकरोड पर डेरा डाले हुए था। ग्रामीणों द्वारा भगाने पर तालाब में जा घुसा, इसके बाद वहीं पड़ा रहा। ग्रामीणों की सूचना पर प्रभारी डीएफओ रमेश चौहान मौके पर पहुंचे थे। तेंदुआ रेस्क्यू किया जाता, मगर इससे पूर्व ही उसने दम तोड़ दिया। मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम सामाजिक वानिकी प्रभाग मुख्यालय पर तीन पशु चिकित्सकों के पैनल द्वारा किया गया था।
जबड़े में फ्रैक्चर भी कर रहा इशारा
वन महकमा बेसुध तेंदुए को नहीं बचा सका और पोस्टमार्टम होने के बाद भी उसकी मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। मगर, तेंदुए के शरीर पर मिले घाव व अन्य चोटों के निशान ने कई सवाल खड़े कर दिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए के गले से लेकर शरीर के कई हिस्से में पुराने गहरे घाव पाए गए। जबकि उसके शरीर के अंदरुनी हिस्से सुरक्षित पाए गए। मौत का कारण स्पष्ट न होने पर उसका बिसरा सुरक्षित किया गया। हालांकि पोस्टमार्टम करने वाले पैनल ने तेंदुए की मौत सेप्टीसीमिया से होने की आशंका जताई है। इन सबके बीच पोस्टमार्टम के दौरान तेंदुए का अगला पंजा बुरी तरह जख्मी पाया गया। जिससे उसके पंजे की हड्डियां तक साफ दिख रहीं थी। वहीं उसका जबड़ा भी फ्रैक्चर पाया गया। गायब पंजा और जबड़े में फ्रैक्चर कहीं न कहीं तेंदुए के शिकारियों द्वारा लगाए गए फंदे में फंसने और फिर उससे खुद को मुक्त करने की ओर इशारा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि तेंदुआ फंदे में फंसा होगा और फिर फंदे से निकलने की जुगत में ही पंजा गंवा बैठा होगा। जबड़े में मिला फ्रैक्चर भी तेंदुए के साथ हुई शिकार की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल जिम्मेदार इस मामले में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभारी डीएफओ रमेश चौहान ने बताया कि मृत मिले तेंदुए का पोस्टमार्टम उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तीन सदस्यीय पशु चिकित्सकों के पैनल द्वारा किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। बिसरा प्रिजर्व किया गया है।
