आरसीआई में पाया इलाज... कैंसर को दी मात अब खिलखिला रही जिंदगी

Amrit Vichar Network
Edited By Pradeep Kumar
On

बरेली। बीते वर्षों में कैंसर का नाम सुनते ही लोगों की आंखों के सामने मौत नाचने लगती थी, वर्ष 2022 से बड़ी संख्या में गंभीर रोगियों ने कैंसर को मात दी है और अब जिंदगी खिलखिला रही है उनको ये नई जिंदगी देने के लिए ढाल बना है बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट (आरसीआई)।

रोहिलखंड कैंसर संस्थान मध्य में स्थित 200 बेड का अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कैंसर संस्थान है। जिसकी स्थापना वर्ष 2022 में  प्रतिष्ठित रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में की गई थी। इसका उद्देश्य रोहिलखंड क्षेत्र और आसपास के जिलों के कैंसर रोगियों की अपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति करना था। यह लखनऊ से 245 किलोमीटर और दिल्ली से 255 किलोमीटर दूर है। यह हवाई और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। बरेली हवाई अड्डा केवल 2 किलोमीटर और रेलवे जंक्शन 5 किलोमीटर दूर है।

इन सुविधाओं से कैंसर से मिल रही मात : आरसीआई के निदेशक डॉ. अर्जुन अग्रवाल बताते हैं कि यहां जर्मन की कोबाल्ट आधारित सैगिनोवा 25 चैनल वाली अत्याधुनिक ब्रैकी थेरेपी इकाई, रेडियोथेरेपी सिमुलेशन और योजना के लिए एक समर्पित वाइड बोर  सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध है। इतना ही नहीं रोहिलखंड कैंसर संस्थान इस क्षेत्र में पीईटी-सीटी सेवाएं प्रदान करने वाला पहला संस्थान है। वहीं डीएम मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट के तहत  साइटोटॉक्सिक कीमोथेरेपी रोगियों को किफायती और मामूली शुल्क पर व्यापक कैंसर देखभाल के साथ अंतरराष्ट्रीय मानकों की अत्याधुनिक रेडियोथेरेपी सुविधा के साथ ही बाह्य बीम रेडियोथेरेपी के लिए अत्याधुनिक ट्रू बीम एसटीएक्स लिनैक मशीन उपलब्ध है। यह एसआरएस, एसबीआरटी, आईजीआरटी, आईएमआरटी, वीएमएटी, 3डी सीआरटी जैसी फोटॉन थेरेपी पद्धतियों से भी मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। पूर्व में मरीजों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भटकना पड़ता था लेकिन संस्थान में एक ही छत के नीचे जांच के साथ ही इलाज की सभी सुविधाएं मिल सकेंगी।

12

डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने बताया कि इंस्टीट्यूट में गामा कैमरा हाई डोज थैरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटर की नींव दो माह पूर्व रखी गई है। यूनिट का निर्माण आरंभ है। इस आधुनिक तकनीक से गंभीर रोगियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। अभी तक पैट स्कैन, गामा कैमरा थैरेपी के लिए मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों के चक्कर लगाने पड़ते थे।  लेकिन अब ही बरेली मंडल में पैट स्कैन और गामा थैरेपी का आरंभ होना किसी गौरव से कम नहीं है। 

संबंधित समाचार