कानपुर : निर्वाचन कार्य में लापरवाही, सहायक अध्यापक निलंबित
अमृत विचार, कानपुर, बिल्हौर : उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने निर्वाचन कार्य में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में एक सहायक अध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और निर्वाचन अधिनियम की अवहेलना करने पर की गई है।निलंबन आदेश बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह द्वारा जारी किया गया। कार्रवाई अपर नगर मजिस्ट्रेट (द्वितीय) एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) 216 कानपुर कैंट विधानसभा की संस्तुति पर आधारित है।निलंबित किए गए शिक्षक कमल सिंह है जो प्राथमिक विद्यालय पातिन निवादा, विकास खंड बिल्हौर में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।
लापरवाही के मुख्य कारण
ईआरओ 216 कानपुर कैंट ने पत्र के माध्यम से बीएसए को अवगत कराया था कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक विधानसभा की निर्वाचक नामावलियों का विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
बीएलओ के रूप में उदासीनता: सहायक अध्यापक कमल सिंह को भाग संख्या 176 में बूथ लेवल ऑफिसर के रूप में नामित किया गया था। आरोप है कि उनके द्वारा निर्वाचन कार्य में कोई रुचि नहीं ली जा रही थी और लगातार दिए जा रहे निर्देशों की अवहेलना की जा रही थी।
बिना सूचना अनुपस्थिति: निलंबित बीएलओ के सुपरवाइजर ने बताया कि संबंधित अध्यापक बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के पिछले कई दिनों से जनपद सीमा के बाहर निवासित थे।
कार्य प्रभावित: उनकी अनुपस्थिति के कारण एसआईआर का महत्वपूर्ण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। इन कृत्यों को निर्वाचन कार्य के प्रति घोर उदासीनता मानते हुए, निर्वाचन अधिनियम 1950 के अंतर्गत निलंबन की संस्तुति की गई।
निलंबन के दौरान की शर्तें
निलंबन अवधि में शिक्षक कमल सिंह को वित्तीय नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है, निलंबित अवधि के दौरान वह किसी अन्य सेवायोजन अथवा व्यवसाय में संलग्न नहीं रहेंगे। इसका प्रमाण पत्र देना उनके लिए अनिवार्य होगा। निलंबन काल में उन्हें बीआरसी बिल्हौर से संबद्ध किया गया है, जहाँ उन्हें अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
इस पूरे प्रकरण की आगे की जांच की जाएगी, जिसके लिए आरोप पत्र (चार्जशीट) पृथक से जारी किया जाएगा।
यह कार्रवाई चुनाव आयोग के निर्देशों की अनदेखी करने वाले कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
