मुरादाबाद: ठंड में ठिठुर रहीं गायें, गो शालाओं में पुख्ता इंतजाम नहीं
मुरादाबाद,अमृत विचार। इंसान हो या जानवर सर्दी सभी के लिए बड़ी दुश्वारी है। शहर में बेजुबान पूरी तरह भगवान भरोसे हैं। जबकि गो सेवा को लेक प्रशासनिक तंत्र की भी जिम्मेदारी है। सच तो यह है कि संगठनों की तरफ से किए गए इंतजाम न के बराबर दिख रहे हैं। कहीं जानवर ठिठुर रहे हैं, …
मुरादाबाद,अमृत विचार। इंसान हो या जानवर सर्दी सभी के लिए बड़ी दुश्वारी है। शहर में बेजुबान पूरी तरह भगवान भरोसे हैं। जबकि गो सेवा को लेक प्रशासनिक तंत्र की भी जिम्मेदारी है। सच तो यह है कि संगठनों की तरफ से किए गए इंतजाम न के बराबर दिख रहे हैं। कहीं जानवर ठिठुर रहे हैं, तो कहीं पर सफाई न होने से गोबर के बीच रहने को मजबूर हैं। ऐसे में सवाल यही उठता है कि आखिर इन बेजुबान बेसहारों का गुनाह क्या है?
अमृत विचार टीम की पड़ताल में कई ऐसे तथ्य सामने आए। टीम ने देखा कि मिलन विहार स्थित कान्हा गो सेवा केंद्र में पचास गाय हैं, जो गला देने वाली इस सर्दी में गर्माहट की राह ताक रहीं थी। यहां आलम यह रहा कि गाय सूखा भूसा खाकर अपना पेट भर रही हैं। अभी तक इनके लिए अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे कुछ राहत इनको मिल सके। टिन शेड के नीचे जहां जानवर बैठते हैं। वहां गंदगी का साम्राज्य है। नियमित सफाई न होने से गाय परेशान हो रही हैं। यही हाल महानगर की अन्य गोशालाओं का है।
श्रीभगवती गो पुनर्वास आश्रम में 236 गायें हैं। इनके लिए बैठने के लिए पुआल (पराली) की व्यवस्था यहां अभी नहीं है। जिस टिन-शेड के नीचे जानवर बैठ रहे हैं, वहां भी गर्मी मिलने वाली किसी चीज का कोई इंतजाम नहीं है। आश्रम के अध्यक्ष दीपक वाष्र्णेय ने टिन शेड के चारों ओर त्रिपाल लगवाया है, जिससे ठंड में जानवरों को बचाया जा सके। मगर परिसर में कहीं भी अलाव जलाने की व्यवस्था अभी तक नहीं हो सकी है।
फिलहाल किसी तरह की कमियां संज्ञान में नहीं है। संचालक से बात कर समय-समय पर परिसर की सफाई कराने के निर्देश हैं। जल्द अलाव जलाने की व्यवस्था कराई जाएगी। जानवरों को सर्दी न लगे इसलिए त्रिपाल लगवाया जा रहा है। चारा दाना की व्यवस्था में भी सुधार कराया जाएगा। -मोहम्मद दिलशाद, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम
सर्दियों में तापमान गिर जाने की वजह से पशुओं में निमोनिया की बीमारी पनपती है। यही कारण है कि सर्दियों में पशुओं की मौत के मामले ज्यादा सामने आते हैं। इससे बचाव का कारण यही है कि गाय के नीचे प्याल और सूखी घास आदि को रखकर इन्हें सर्दियों से बचाया जा सकता है। -डा. सुमन, पशु चिकित्साधिकारी
