मॉय फर्स्ट राइड: चार पहियों पर आत्मविश्वास की शुरुआत
मेरे लिए पहली बार कार चलाना सिर्फ़ एक नया हुनर सीखना नहीं था, बल्कि अपने डर पर जीत पाने की एक बड़ी कोशिश थी। आज भी उस दिन को याद करती हूं, तो दिल में हल्की-सी घबराहट और ढेर सारी खुशी एक साथ महसूस होती है। मैंने कार चलाना सीखने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया था। मन में कई सवाल थे-क्या मैं ठीक से चला पाउंगी? कहीं गलती हो गई तो? घरवाले और समाज की बातें भी अक्सर कानों में गूंजती थीं कि “महिलाओं के लिए ड्राइविंग मुश्किल होती है।”
लेकिन कहीं न कहीं मेरे भीतर यह इच्छा ज़रूर थी कि मैं खुद स्टीयरिंग संभालूं और अपनी राह खुद तय करूं। जिस दिन पहली बार ड्राइविंग सीट पर बैठी, हाथ अपने आप कांप रहे थे। स्टीयरिंग पकड़ते ही उसकी ठंडक हथेलियों तक उतर आई। सामने फैला हुआ डैशबोर्ड, शीशों में दिखती सड़क और पैरों के नीचे क्लच-ब्रेक-सब कुछ नया और थोड़ा डरावना लग रहा था। ट्रेनर ने शांत आवाज में कहा, “डरने की ज़रूरत नहीं, आराम से।” मैंने गहरी सांस ली और खुद को संभाला। जैसे ही इंजन स्टार्ट किया, दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। पहली बार एक्सीलेरेटर दबाते समय ऐसा लगा मानो पूरी दुनिया मुझे देख रही हो।
कार धीरे-धीरे आगे बढ़ी और उसी पल मेरे भीतर कुछ बदल गया। डर अभी भी था, लेकिन उसके साथ एक अजीब-सी खुशी भी जुड़ गई थी। हर गियर बदलने पर आत्मविश्वास थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा था। सड़क पर निकलते ही मैंने शीशे में खुद को देखा। आंखों में डर के साथ-साथ गर्व भी था। मोड़ लेते समय हाथ सख्त हो जाते थे, लेकिन जैसे-जैसे कार मेरी पकड़ में आ रही थी, मन हल्का होता जा रहा था। हवा खिड़की से अंदर आ रही थी और मुझे एहसास हो रहा था कि मैं सिर्फ कार नहीं चला रही, बल्कि अपनी सीमाओं को भी पीछे छोड़ रही हूं।
एक बार कार हल्की-सी झटकी और मैं घबरा गई, लेकिन प्रशिक्षक की मुस्कान और हौसला देखकर फिर से संभल गई। उस छोटी-सी गलती ने मुझे सिखाया कि सीखने की प्रक्रिया में डर और गलतियां दोनों जरूरी हैं।
जब ड्राइव खत्म हुई और मैंने कार रोकी, तो दिल से एक लंबी राहत की सांस निकली। चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गई। वह पल मेरे लिए बेहद खास था। पहली बार कार चलाकर मुझे यह एहसास हुआ कि आत्मनिर्भरता कितनी ताकत देती है। आज मैं जब भी कार चलाती हूं, उस पहले दिन को याद करती हूं। वह अनुभव मुझे हर बार याद दिलाता है कि अगर हिम्मत की स्टीयरिंग अपने हाथ में ले ली जाए, तो जिंदगी की कोई भी सड़क मुश्किल नहीं लगती।-प्रो. प्रीती अभिषेक विमल, नई दिल्ली
