Moradabad: 1.99 करोड़ की बर्न यूनिट अब भी प्लास्टिक सर्जन के इंतजार में
मुरादाबाद, अमृत विचार। वर्ष 2025 भी समाप्ति की ओर है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला पुरुष अस्पताल में 1.99 करोड़ रुपये की लागत से बनी बर्न यूनिट एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग को अब तक प्लास्टिक सर्जन नहीं मिल सका है। साल दर साल उम्मीदें बंधती रहीं और टूटती रहीं, मगर जमीनी हकीकत यह है कि इस महत्वपूर्ण यूनिट में मरीजों का इलाज आज भी विशेषज्ञ के बिना ही किया जा रहा है। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लोकार्पित यह भवन अब एक और बीतते साल का गवाह बनने जा रहा है।
15 फरवरी 2021 को जब इस बर्न यूनिट का लोकार्पण हुआ था, तब दावा किया गया था कि जिले और आसपास के क्षेत्रों के जले हुए, एसिड अटैक पीड़ित और गंभीर घावों से जूझ रहे मरीजों को अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यूनिट में 10 बेड की व्यवस्था की गई, ताकि गंभीर मरीजों को भर्ती कर बेहतर इलाज दिया जा सके। लेकिन वर्ष 2021 से लेकर अब तक चार कैलेंडर साल गुजर चुके हैं और 2025 भी समाप्ति की ओर है, फिर भी प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी।
चिकित्साधिकारियों के अनुसार फिलहाल बर्न यूनिट में आने वाले मरीजों का उपचार जनरल सर्जन द्वारा किया जा रहा है। सीमित स्तर तक इलाज संभव है, लेकिन गंभीर जलन, स्किन ग्राफ्टिंग और पुनर्निर्माण सर्जरी जैसे मामलों में प्लास्टिक सर्जन की भूमिका जरूरी होती है। विशेषज्ञ न होने के कारण ऐसे मरीजों को मेरठ के मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया जाता है।
हर साल सर्दियों में अलाव और हीटर से झुलसने के मामले, गर्मियों में शॉर्ट सर्किट और रसोई गैस से जलने की घटनाएं सामने आती हैं।
इसके अलावा औद्योगिक हादसे और घरेलू दुर्घटनाएं भी जिले में आम हैं। बावजूद इसके, 10 बेड की बर्न यूनिट पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो पा रही है। मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह स्थिति पीड़ादायक है, क्योंकि जिला अस्पताल में सुविधा होने के बावजूद उन्हें बाहर इलाज कराना पड़ता है। सीएमएस डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि प्लास्टिक सर्जन की तैनाती के लिए लगातार शासन स्तर पर मांग भेजी जा रही है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल जनरल सर्जन मरीजों का इलाज कर रहे हैं और जैसे ही प्लास्टिक सर्जन की नियुक्ति होगी, बर्न यूनिट को पूरी तरह सक्रिय कर दिया जाएगा। हर गुजरता साल यह साबित कर रहा है कि सरकारी योजनाएं भवन तक सीमित रह जाती हैं, जबकि मानव संसाधन की व्यवस्था समय पर नहीं हो पाती। जरूरत इस बात की है कि आने वाला वर्ष इस यूनिट के लिए केवल तारीख न बने, बल्कि मरीजों को वास्तविक राहत दिलाने वाला साल साबित हो।
