संपादकीय:उल्लेखनीय उपलब्धि

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Published By Monis Khan
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उत्तर प्रदेश का ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस में 12 वें स्थान से दूसरे पायदान पर पहुंचना राज्य के प्रशासनिक और आर्थिक चरित्र में आए बुनियादी बदलाव का संकेत है। राज्य के लिए यह उपलब्धि अत्यंत सराहनीय है, क्योंकि लंबे समय तक जो उत्तर प्रदेश निवेश के लिहाज से ‘कठिन’ और ‘अनिश्चित’ गंतव्य माना जाता रहा, वह अब सुधारों और पारदर्शिता का चेहरा बनकर उभरा है।

वाणिज्य और उद्योग संवर्धन विभाग के बिज़नेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान के तहत जारी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश की यह प्रगति बताती है कि सुधार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर उतरे हैं। यह बदलाव आकस्मिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल गवर्नेंस का परिणाम है, जो सूबे के आर्थिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगा। 

निवेशक जहां नीति स्थिरता, समयबद्ध मंजूरी और न्यूनतम हस्तक्षेप देखते हैं, वहीं जाते हैं और तब पूंजी प्रवाह स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनाई गई ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की नीति ने निवेश बाधाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डिजिटल पारदर्शिता, प्रक्रियाओं का सरलीकरण और जवाबदेही ने राज्य को अधिक भरोसेमंद निवेश गंतव्य बनाया है। लॉजिस्टिक्स रैंकिंग में ‘अचीवर्स’ श्रेणी में जगह बनाना और गुड गवर्नेंस इंडेक्स में वाणिज्य एवं उद्योग वर्ग में ऊपर आना द्योतक है कि बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक दक्षता पर एक साथ काम हुआ है।

उद्यम स्थापना, श्रम नियमों के सरलीकरण और भूमि प्रशासन जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश का टॉप अचीवर बनना यह दिखाता है कि औद्योगिक बाधाओं को व्यवस्थित रूप से हटाया गया है। निवेश सुविधा, श्रम पंजीकरण, पर्यावरण अनुमति, सिंगल विंडो सिस्टम और निर्माण अनुमति जैसी प्रक्रियाओं को सरल करने तथा अनुपालन बोझ और दंडात्मक प्रावधानों को कम करने से निवेशकों का समय और लागत दोनों बचे हैं। इन सुधारों ने खासकर मध्यम और छोटे उद्यमों को बढ़ावा दिया है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। योगी सरकार द्वारा ‘निवेश मित्र’ के अगले संस्करण निवेश मित्र 3.0 की तैयारी से अपेक्षा है कि यह और अधिक यूज़र-फ्रेंडली, डेटा-ड्रिवन और समयबद्ध होगा। वहीं ‘मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र योजना’ ने औद्योगिक गलियारों में निवेश को आकर्षित करने में सहायक भूमिका निभाई है, जिससे विदेशी और घरेलू पूंजी प्रवाह बढ़ने के संकेत मिले।

निर्माण, विनिर्माण और औद्योगिकीकरण के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्र के रूप में उभर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसी योजनाओं के अपेक्षाकृत बेहतर क्रियान्वयन से रोजगार के अवसर बढ़े हैं और बेरोजगारी दर 19 से घट कर ढाई फीसदी पर आ गई है। इसके साथ प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि विकास की व्यापकता को दर्शाती है, हालांकि एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के लिए अभी और काम करना होगा, विशेषकर उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, निर्यात संवर्धन, शहरी अवसंरचना और हरित औद्योगिकीकरण पर।