लापरवाही की कीमत: अयोध्या में निर्मला हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द, निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग की सख्त चेतावनी
पुनीत श्रीवास्तव, अयोध्या, अमृत विचार : साकेतपुरी के निर्मला हाॅस्पिटल में ओवरडोज से हुई सरोज की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने लाइसेंस रद कर नजीर पेश की है। कार्रवाई के जरिए मरीजों के इलाज में लापरवाही करने वाले निजी अस्पतालों को बड़ी संदेश दिया। तीन दशक में पहली अवसर है जब स्वास्थ्य विभाग से इतनी गंभीरता से किसी मामले की जांच की गई, रैपिड एक्शन किया गया। कारण चाहे मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आना हो या फिर जनान्दोलन के चलते। विभाग ने जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जबकि हाॅस्पिटल पर कार्रवाई में विलम्ब को लेकर विभाग पर तमाम आरोप भी लगते रहे। विभाग से अभी दोनों निर्मला व सोना हास्पिटल के कर्मियों के बयान दर्ज करने का सिलसिला जारी है। ऐसे में देर सबेर सोना हास्पिटल पर भी बड़ी गाज गिर सकती है। विभाग बड़े करीने से दोनों हाॅस्पिटलों की चार्जशीट तैयार कर रहा है, ताकि मामला कोर्ट तक पहुंचे तो सभी तथ्य व साक्ष्य उपलब्ध रहें।
बता दें कि अब तक ऐसे मामलों में विभाग आमतौर पर केवल नोटिस जारी करने और जांच टीम गठित करने या मामूली जुर्माने तक सीमित रहता था, लेकिन इस बार ताबड़तोड़ और निर्णायक कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रदद किया गया। हलकारा का पुरवा की सरोज कौशल (50) की मौत के बाद परिजनों ने निर्मला अस्पताल पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया था। पुत्र सुशील के मुताबिक उनकी मां को अस्पताल में इंजेक्शन का ओवरडोज दिए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। लखनऊ केनिजी अस्पताल में मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग नेनिर्मला हॉस्पिटल पर शिकंजा कसना शुरू किया। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब से मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। यह कार्रवाई निजी अस्पताल संचालकों के लिए संकेत है कि मरीज सुरक्षा और इलाज के मानकों का पालन अनिवार्य है। लापरवाही या नियम उल्लंघन पर लाइसेंस रद होने के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार बताते हैं कि उन्होंने अभी तक इस तरह की कठोर कार्रवाई नहीं देखी। बताया कि 90 और 95 के दशक में ऐसे मामलों में नोटिस ही देकर इतिश्री कर ली जाती थी।
बढ़ेगीं निर्मला व सोना हाॅस्पिटल की मुश्किलें, 11 और के हुए बयान
ओवरडोज से महिला सरोज की मौत के बहुचर्चित मामले में अभी आरोपी निर्मला और सोना हास्पिटल की मुश्किलें और बढ़ेगीं। स्वास्थ्य विभाग ने निर्मला हाॅस्पिटल का लाइसेंस रद करने और ओटी सीज करने के बाद भी कर्मियों के बयान दर्ज करने का सिलसिला जारी रखा है। सोमवार को भी कार्रवाई से पहले दिन भर विभाग की टीम द्वारा निर्मला हाॅस्पिटल के कर्मियों के बयान दर्ज किए जाते रहे। उसके बाद अचानक छापेमारी की कार्रवाई की गई। मंगलवार को कुल 11 लाेगों के बयान दर्ज किए गए। इसमें िनर्मला हॉस्पिटल के अलावा सोना हॉस्पिटल के एनेस्थेटिस्ट व अन्य चिकित्सक शामिल रहे।
सूत्रों की मानें तो दोनों हास्पिटलों पर अभी और शिकंजा कसा जाएगा। इसके लिए विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स जुटी हुई है। स्वास्थ्य विभाग से इसके लिए बाकायदा दो डिप्टी सीएमओ समेत एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को लगाया गया है, जो रोजाना सीएमओ आॅफिस में दोनों हाॅस्पिटलों के कर्मियों को तलब कर सवाल दर सवाल कर बयान दर्ज करने के लिए जुटे हैं। इतना ही नहीं खुद सीएमओ डॉॅ. सुशील कुमार बनियान पूरी जांच प्रक्रिया की मानिटरिंग कर रहे और नियमित स्पेशल टास्क फोर्स से रिपोर्ट ले रहे हैं। बयान दर्ज कराने के लिए आने वाले कर्मियों से स्पष्ट कहा जा रहा है जो सत्य और तथ्यात्मक है उसकी जानकारी दें, यदि बाद में कोई बयान में विसंगति पाई जाती है तो उन पर भी कार्रवाई की जा सकती है। सूत्रों की मानें तो निर्मला हाॅस्पिटल से लिए गए डीवीआर का परीक्षण भी विशेषज्ञों से कराया जाएगा और गड़बड़ी मिलने पर उसको भी साक्ष्य के रूप में संरक्षित रखा जाएगा। बताया जा रहा है स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट की तीन से चार प्रतियां और पीडीएफ तैयार कर रखेगा, ताकि आगे यदि कोई हाॅस्पिटल संचालक जांच पर उंगली उठाता है तो तथ्यों के आधार जवाब दिया जा सके। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कुल 20 से 25 अधिकारियों और कर्मचारियों को गोपनीयता के साथ जुटाया गया है।
भड़कीं डाॅक्टर बनौधा की पत्नी, सीएमओ कक्ष में काटा हंगामा
साकेतपुरी स्थिति निर्मला हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द होने पर भड़कीं डॉ.आरके बनौधा की पत्नी डॉ. रंजू बनौधा ने दर्शननगर स्थिति सीएमओ ऑफिस में जमकर हंगामा काटा। सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान के कक्ष में 15 मिनट तक भड़की रहीं। इसके बाद डॉ. आरके बनौधा ने मौके पर पहुंचकर पत्नी को संभाला और सीएमओ से क्षमा याचना की। हालांकि सीएमओ ने बड़ा हृदय िदखाते हुए डॉ.रंजू बनौधा के कृत्य पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी व कार्रवाई से इन्कार किया। कहा िक मैं यहां जनता के लिए बैठा हूं। मेरा व्यक्तिगत कुछ भी नहीं है।
डिप्टी सीएमओ डॉ.राजेश चौधरी ने बताया कि डॉ.रंजू बनौधा दाेपहर के समय सीएमओ ऑफिस पहुंच गई थी। हॉस्पिटल से बयान लेने के लिए बुलाए जा रहे कर्मियों और िचकित्सकों को लेकर डॉ. रंजू ने सीएमओ से नाराजगी जताई। इस दौरान हंगामे की िस्थति बनी रही। डॉ. राजेश के मुताबिक मौके पर पत्रकार भी मौजूद थे। उन्होंने कवरेज करनी शुरू कर दी तो उनका फोन छीनने की कोशिश की गई। बाद में उन्होंने समझाकर बाहर किया गया। इसके बाद डॉ.आरके बनौधा आ गए थे। सीएमओ डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष हो रही है। अब हंगामे का क्या संज्ञान लिया जाए। कुछ और होगा तो शासन को जरूर सूचित करेंगे।
विभाग की जवाबदेही जनता के प्रति है न की िकसी व्यक्ति विशेष के लिए। डॉक्टर आरके बनौधा की धर्मपत्नी आई थीं, अब क्या कुछ उन्होंने किया इसकी विस्तार से बताने की आवश्यकता नहीं है। उनके पति आए थे। क्षमा याचना की। संपूर्ण मामले की जांच जारी है। बयान दर्ज हो रहे हैं। निर्मला और सोना हॉस्पिटल पर अभी और कार्रवाइयां हो सकती हैं।
डॉ. सुशील कुमार बानियान, सीएमओ
