UP: जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान में 1200 से 1500 वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा
संभल, अमृत विचार। जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की पैमाइश के बाद प्रशासन ने भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राजस्व विभाग की पैमाइश के उपरांत एक जांच समिति का गठन किया गया है, जो सात दिनों के भीतर दुकानों और मकानों के स्वामियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपेगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जहां भी अवैध कब्जा पाया जाएगा, वहां धारा 67 के तहत कार्रवाई करते हुए कब्जा हटाया जाएगा।
जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत प्राप्त होने के बाद पैमाइश के लिए टीम गठित की गई थी। गाटा संख्या 32/2 में दर्ज 4780 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले कब्रिस्तान की पैमाइश के दौरान 1200 से 1500 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्रवाई की मॉनिटरिंग करते रहे और पैमाइश शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। आगे की कार्रवाई तहसीलदार न्यायालय में नियमानुसार की जाएगी। डीएम ने दो टूक कहा कि अवैध कब्जा जहां भी मिलेगा, हटाया जाएगा। प्रशासन किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं करेगा।
पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि पैमाइश के दौरान मुरादाबाद रेंज और बरेली जोन से पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी। कहा कि दुकानों और मकानों के स्वामियों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। यदि दस्तावेज फर्जी पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया जाएगा। प्रशासन के रुख को देखकर कब्रिस्तान की जमीन पर दुकान व मकान बनाने वालों में हड़कंप मचा है।
शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष कार्रवाई की जताई उम्मीद
विवादित धार्मिक स्थल जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की भूमि की पैमाइश के बाद शिकायतकर्ता श्री कल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट सुभाष चंद्र त्यागी ने कहा है कि उन्हें इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद है। कहा कि 1989 से पहले इस भूमि पर केवल एक मकान बना था, लेकिन 1989 में मुलायम सिंह यादव की सरकार आने के बाद अवैध निर्माण शुरू हो गया। पहले अस्थायी और फिर स्थायी रूप से तीन- चार मंजिला मकान और दुकानें बना दी गईं। इन मकानों और दुकानों के नक्शे किस आधार पर पास हुए, यह भी स्पष्ट नहीं है, जबकि संबंधित भूमि कब्रिस्तान के नाम पर दर्ज है। यह भी जांच का विषय है कि इन निर्माणकर्ताओं को बैनामे किसके द्वारा किए गए।
दुकानदारों का दावा: वर्षों से दे रहे हाउस टैक्स व वाटर टैक्स, कब्जे का आरोप निराधार
पैमाइश के समय जब एक दुकान की नपाई की गई तो दुकानदार साजिद हुसैन ने अधिकारियों से कहा कि अवैध कब्जे के आरोप गलत हैं। वे वर्षों से हाउस टैक्स और वाटर टैक्स नियमित रूप से जमा कर रहे हैं। उनके पास सभी टैक्स की रसीद और संबंधित दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि करीब 35 साल तक वह इस स्थान पर किराए पर रहे, इसके बाद उन्होंने यह जगह खरीदी थी। दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि वे प्रशासन के आदेश का पूरा पालन कर रहे हैं और पैमाइश में पूरा सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कब्रिस्तान इस स्थान पर नहीं है, बल्कि पिछले रोड की ओर है। ऐसे में कब्जे का आरोप निराधार है। दुकानदारों का कहना है कि वे अपने दस्तावेज जांच समिति के सामने प्रस्तुत करेंगे और जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
