यूपी में 61,932 आयुष्मान कार्ड पाए गए संदिग्ध, अनियमितताओं पर साचीज ने शुरू की सख्ती
लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश में आयुष्मान कार्ड से जुड़ी अनियमितताओं को रोकने के लिए स्टेट हेल्थ एजेंसी यानी साचीज द्वारा सख्त और तकनीकी स्तर पर प्रभावी कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में अब तक 5.44 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिनका सत्यापन करने के लिए बेनिफिशियरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (बीआईएस-2.0) लागू किया गया है। प्रारंभिक जांच में इन कार्डों में से 61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं। जिसके बाद आधार द्वारा ई-केवाईसी के बाद ही आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं।
यह जानकारी साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बुधवार को दी, उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में फर्जी लाभार्थियों की रोक लगाने के लिए अधिकांश श्रेणियों में ‘एड मेंबर’ का विकल्प समाप्त कर दिया गया है। केवल एसईसीसी-2011 के तहत चिन्हित अवशेष परिवारों में ही नए सदस्य जोड़े जा सकते हैं।
सीईओ ने बताया कि साचीज द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, भारत सरकार के सहयोग से एआई आधारित निगरानी प्रणाली को और सुदृढ़ किया गया है। उक्त एसएएफयू बीआईएस पोर्टल के माध्यम से संदिग्ध कार्डों की पहचान की जा रही है। इसमें लगे ऑटोमेटेड ट्रिगर संदिग्ध कार्डों को स्वतः चिन्हित कर इलाज पर रोक लगा देते हैं। ऐसे कार्डों की ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराया जाता है।
अर्चना वर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 से अब तक बने कुल आयुष्मान कार्डों में से 61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए, जिनकी जांच के लिए जिला स्तर पर फील्ड इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (एफआईओ) तैनात किए गए हैं। अब तक 48,435 कार्डों का भौतिक सत्यापन कराया जा चुका है। संदिग्ध कार्डों का विवरण सभी जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भेजकर जांच के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि अनियमितताओं के मामलों में साचीज द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। एक मामला कोतवाली हजरतगंज में 6 जून 2025 को और दूसरा साइबर क्राइम थाना, लखनऊ में 1 नवंबर 2025 को दर्ज कराया गया। जांच एजेंसियों को आवश्यक डाटा उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 24 दिसंबर 2025 को एसटीएफ द्वारा चिन्हित एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उसकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। संबंधित सभी आयुष्मान कार्यों की गहन जांच जारी है।
