Bareilly : सेटेलाइट से त्रिशूल तिराहा तक आठ लेन सड़क पर मंथन
आयुक्त सभागार में मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों को विस्तृत सर्वे कर प्राक्कलन तैयार करने के दिए निर्देश
बरेली, अमृत विचार। शहर के यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पीलीभीत बाईपास रोड के आठ लेन के विकास की योजना पर एक बार फिर मंथन शुरू कर दिया है। मंडायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने गुरुवार को आयुक्त सभागार में सेटेलाइट चौराहा से त्रिशूल तिराहा तक सड़क के चौड़ीकरण के संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की।
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन भगत सिंह ने बताया कि करीब 11.3 किलोमीटर लंबी सड़क को छह लेन में चौड़ीकरण किए जाने के लिए विद्युत विभाग और वन विभाग के साथ संयुक्त सर्वे कराया जा चुका है। सर्वे के उपरांत प्राक्कलन तैयार कर लिया गया है। उक्त मार्ग की चौड़ाई लगभग 200 फीट (61 मीटर) है। इस पर मंडलायुक्त ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आठ लेन सड़क और सर्विस रोड निर्माण की संभावना पर जोर दिया। इसके लिए विद्युत विभाग, वन विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम को विस्तृत सर्वे कर प्रारंभिक प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि आने वाले वर्षों में यातायात की समस्या से स्थायी राहत मिल सके।
बीडीए उपाध्यक्ष डा. मनिकंडन ए. के अनुसार पीलीभीत रोड के साथ बीडीए की ओर से डोहरा रोड के चौड़ीकरण की भी योजना बनाई जा रही है। इस मार्ग के चौड़ृीकरण से रामगंगा नगर आवासीय योजना और ग्रेटर बरेली का आवागमन काफी सुलभ हो जाएगा। इसके लिए सर्विस रोड को भी पूरी तरह आमजन के लिए खुला रखा जाएगा। संयुक्त सर्वे के बाद सेटेलाइट से बैरियर टू तक आठ लेन मार्ग भी बिना भूमि अधिग्रहण के किया जाएगा। इसके लिए पीडब्ल्यूडी पहले ही पर्याप्त भूमि की उपलब्धतता बता चुका है। बैठक में नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य, डीएफओ दीक्षा भंडारी, लोक निर्माण विभाग और विद्युत विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
सिक्सेलन का पहले ही भेजा जा चुका है प्रस्ताव
सेटेलाइट से पीलीभीत बाईपास पर जाम की स्थिति बढ़ती जा रही है। इस समस्या का निदान कराने के लिए इस रोड को सिक्सलेन में परिवर्तित कराने के लिए लोक निर्माण विभाग ने 7.420 किमी सड़क चौड़ीकरण और सृदृढ़ीकरण कराने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पिछले वित्तीय वर्ष में ही भेज दिया था, लेकिन स्वीकृत नहीं हो पाने से इस साल दोबारा भेजा गया। बाद में इसमें वन विभाग का छह करोड़ रुपये का प्रस्ताव सम्मिलित करते हुए फिर संशोधित एस्टीमेट भेजा गया है। यह प्रस्ताव बीडीए की ओर से भी भेजा जा चुका है।
