UP News : यूपी में आईएएस कैडर की संख्या बढ़ी, PCS अधिकारियों को मिलेगा प्रमोशन का लाभ

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। केंद्र की मोदी सरकार ने उत्तर प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) कैडर की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 683 कर दी है। पहले यह संख्या 652 थी। इसके लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर शक्ति निर्धारण) विनियम, 1955 में संशोधन करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर शक्ति निर्धारण) आठवां संशोधन विनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। 

यह निर्णय 31 दिसंबर को आधिकारिक गजट में प्रकाशित होते ही प्रभावी हो गया। यह संशोधन अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत उत्तर प्रदेश सरकार से परामर्श के बाद किया गया है। इसके तहत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने पीसीएस से आईएएस में पदोन्नति के लिए नौ नए पद जोड़े हैं। 

इन नौ नए पदों और पहले से रिक्त 18 पदों को मिलाकर कुल 27 पदों पर पीसीएस अधिकारियों की पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक होगी। इससे वर्ष 2010 और 2011 बैच के पीसीएस अधिकारियों के आईएएस बनने का रास्ता साफ हो गया है। 

शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैडर संख्या बढ़ने से प्रदेश में विशेष रूप से वरिष्ठ स्तर पर प्रशासनिक दबाव कम होने की उम्मीद है। अधिसूचना के अनुसार, उत्तर प्रदेश कैडर में वरिष्ठ ड्यूटी पदों की कुल संख्या 370 तय की गई है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व (सीडीआर) को 148 पदों तक सीमित किया गया है, जबकि राज्य प्रतिनियुक्ति रिजर्व 92 पदों का होगा। 

प्रशिक्षण रिजर्व में 12 पद और अवकाश एवं कनिष्ठ पद रिजर्व में 61 पद रखे गए हैं। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुल 683 पदों में से 207 पद आईएएस (भर्ती) नियम, 1954 के नियम-8 के तहत पदोन्नति से भरे जाएंगे, जबकि 476 पदों पर सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति होगी। 

संशोधित कैडर संरचना में प्रदेश के प्रमुख पद शामिल हैं, जिनमें मुख्य सचिव, कृषि उत्पादन आयुक्त, औद्योगिक विकास आयुक्त, मंडल आयुक्त, प्रमुख सचिव, जिलाधिकारी तथा विभिन्न विभागों और वैधानिक संस्थाओं के प्रमुख पद शामिल हैं। नए ढांचे में 25 प्रमुख सचिव, 12 मंडल आयुक्त और 46 सचिव स्तर के पद शामिल किए गए हैं। मैदानी स्तर पर 75 जिलाधिकारियों और 84 विशेष सचिवों के पद भी कैडर में शामिल हैं। 

इसके अलावा शहरी विकास प्राधिकरणों, विद्युत वितरण कंपनियों, स्वास्थ्य मिशनों, ग्रामीण विकास एजेंसियों और विभिन्न नियामक संस्थाओं में वरिष्ठ पदों को भी कैडर संरचना में स्थान दिया गया है। इस फैसले को उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

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