दिल्ली दंगा केस : SC से उमर खालिद की जमानत खारिज होने पर छलका पिता का दर्द, कहा- ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है’
नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज किए जाने पर पिता एस.क्यू.आर इलियास ने सोमवार को कहा कि यह “दुर्भाग्यपूर्ण” है। उच्चतम न्यायालय ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में सोमवार को आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
बेटे उमर खालिद की जमानत खारिज होेने पर पिता इलियास ने कहा, “कुछ नहीं कहना। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे कुछ नहीं बोलना। फैसला सामने है और मुझे कुछ नहीं कहना है।” न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने इस मामले में अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।
अब जेल ही मेरी जिंदगी है, जमानत पाने वाले अन्य लोगों के लिए खुश हूं: उमर
इस बीच, उमर खालिद की सहयोगी बनोज्योत्सना ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उमर अन्य आरोपियों को जमानत मिलने से खुश हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘उमर ने कहा-जिन लोगों को जमानत मिली है, उनके लिए मैं बहुत खुश हूं। बहुत राहत मिली है। मैं कल मुलाकात के लिए आऊंगी, इस पर उमर ने कहा- ठीक है, आ जाना। अब यही जिंदगी है।”
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 10 दिसंबर को दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता एवं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू तथा आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद एवं सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। क्षेत्र में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी।
