उपभोक्ताओं के लिए एकमुश्त समाधान योजना बनी आफत, 50 हजार से अधिक मामलों में फंसा पंजीकरण डेटा
लखनऊ, अमृत विचार : पावर कॉरपोरेशन की ओर से बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लाई गई एकमुश्त समाधान योजना अब उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। योजना के तहत पंजीकरण कराने और आंशिक भुगतान करने वाले हजारों उपभोक्ताओं का डेटा उपकेंद्रों पर उपलब्ध नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें भुगतान की रसीद लेकर बार-बार बिजली उपकेंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं के सामने जमा की गई धनराशि के डूबने का खतरा खड़ा हो गया है।
योजना का लाभ उठाने के लिए लाखों उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया और बकाया बिजली बिल के समायोजन के लिए पहली किश्त भी जमा की। बड़े बकायेदारों से लेकर बिजली चोरी में पकड़े गए उपभोक्ताओं तक ने इस योजना के माध्यम से अपने बिल निपटाने की कोशिश की। कई उपभोक्ताओं ने पार्ट पेमेंट की सुविधा का सहारा लिया, लेकिन अब जब वे दूसरी किश्त या शेष राशि जमा करने उपकेंद्र पहुंच रहे हैं तो उनका पंजीकरण डेटा सिस्टम में नहीं मिल रहा है। उपभोक्ताओं को कभी सर्वर की समस्या तो कभी तकनीकी खामियों का हवाला देकर लौटा दिया जा रहा है।
चौक के घंटाघर क्षेत्र निवासी राशिद ने बताया कि उनके ऊपर करीब डेढ़ लाख रुपये का बिजली बिल बकाया था। एकमुश्त समाधान योजना के तहत छूट मिलने के बाद उनका अंतिम बिल एक लाख पांच हजार रुपये तय हुआ। पंजीकरण के समय उन्होंने 20 हजार रुपये जमा किए थे, लेकिन शेष भुगतान करने उपकेंद्र पहुंचे तो रसीद दिखाने के बावजूद पंजीकरण का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसी तरह अहिबरनपुर उपकेंद्र पर बिल जमा कराने पहुंचीं पूजा कश्यप ने बताया कि उन्होंने योजना के तहत 28 हजार रुपये जमा किए थे, लेकिन दूसरी किश्त जमा करते समय सिस्टम में उनका भुगतान दर्ज नहीं मिला। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस तरह के करीब 50 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के मामले फिलहाल फंसे हुए हैं।
अभी तक मेरी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। फिर भी यदि पंजीकरण की धनराशि जमा है तो उसकी जानकारी मिल जाएगी। तकनीकी कारणों से कुछ समस्याएं आ सकती हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस मामले को जल्द ही ठीक करने के निर्देश जारी किए जाएंगे।
-वीपी सिंह, मुख्य अभियंता, जानकीपुरम जोन
