Bareilly : पुराने आंकड़ों से तय होंगी सीटें, बदलेंगे चुनावी समीकरण

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Published By Monis Khan
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महिपाल गंगवार, बरेली। आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की व्यवस्था कुछ अलग ही रंग दिखाएगी। यह पहली बार होगा जब एक ही जनगणना पर पंचायतों का आरक्षण तीसरी बार लागू किया जाएगा। इससे पहले ऐसा अधिकतम दो बार ही हुआ था। आरक्षण को लेकर यह स्थिति वर्ष 2021 में कोरोना की वजह से जनगणना न होने के कारण सामने आई है।

ऐसे में सरकार को पुराने आंकड़ों यानि 2011 की जनगणना को मुख्य आधार मानकर आरक्षण लागू किया जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि कई पंचायतों में उन वर्गों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकता है, जहां उनकी आबादी बहुत कम है। यानि पुराने आंकड़ों के आधार पर नए चुनाव में सीटों का बंटवारा होगा।

पंचायतों में त्रिस्तरीय प्रणाली लागू होने के साथ ही आरक्षण का नियम भी साथ में चलता रहा है। पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था शुरू हुई थी 1995 में, और तब से यह लगातार लागू है। इसके तहत ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष व सदस्य सभी पदों पर पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण मिलता रहा है। पिछड़ी जातियों को 27 प्रतिशत, अनुसूचित जातियों को 21 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों को 2 प्रतिशत आरक्षण तय है। साथ ही, सभी वर्गों के आरक्षित पदों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। 

इसका मतलब यह है कि पंचायतों में आरक्षण सिर्फ वर्गीय नहीं, बल्कि लिंग आधारित भी है। इतिहास की झलक देखें तो 1991 की जनगणना पर 2000 का चुनाव, 2001 की जनगणना पर 2005 और 2010 का चुनाव, और 2011 की जनगणना पर 2015 और 2021 का चुनाव हुआ। अब 2021 में जनगणना न होने के कारण 2026 में भी 2011 के पुराने आंकड़े लागू होंगे। इसका नतीजा यह होगा कि चाहे किसी वर्ग की आबादी बढ़ी हो या घट गई हो, सीटों का बंटवारा पुराने प्रतिशत के अनुसार ही रहेगा। इससे चुनावी समीकरण में नए बदलाव आएंगे, कई जगहों पर उम्मीदवारों के लिए नए मौके पैदा होंगे, जबकि कुछ पुराने नियम उसी तरह कायम रहेंगे।

आगामी चुनाव में प्रधान और बीडीसी सदस्यों के पद होंगे कम
वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर वर्ष 2015 और फिर 2021 में आरक्षण लागू किया गया था। 2021 में जिले में 1193 ग्राम पंचायतों में प्रधान पदों पर चुनाव हुए थे। इसके अलावा ग्राम पंचायत सदस्यों के 14,921, क्षेत्र पंचायत सदस्यों के 1,467, क्षेत्र पंचायत प्रमुख के 15 और जिला पंचायत सदस्यों के 60 पदों पर भी चुनाव हुए थे। वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव में भी पंचायतीराज विभाग को आरक्षण लागू करने के लिए 2011 की जनगणना पर ही भरोसा करना पड़ेगा। इस बार परिसीमन के बाद जिले में चुनाव के दायरे में हल्के बदलाव के साथ 1,188 ग्राम प्रधान, 14,865 ग्राम पंचायत सदस्य, 1,460 क्षेत्र पंचायत सदस्य, 15 क्षेत्र पंचायत प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य के 60 पद शामिल हैं। इस बार भी आरक्षण नियम पुराने प्रतिशत के अनुसार लागू होंगे।

यह व्यवस्था होती है आरक्षण लागू करने में
डीपीआरओ कमल किशोर बताते हैं कि सबसे पहले एसटी, फिर एससी, फिर पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जाता है। इसमें भी वर्ष 2015 व 2021 के चुनाव में जो सीटें किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित की गयी हैं उनको छोड़ते हुए शेष बची सीटों में उस वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा। उदाहरण के लिए यदि एससी का आरक्षण 21 प्रतिशत है तो दो चुनावों में 42 प्रतिशत सीटों पर एससी का आरक्षण लागू किया जा चुका है। अब इसके बाद शेष बची 58 प्रतिशत सीटों में 21 प्रतिशत एससी के लिए आरक्षित की जाएंगी। ऐसे में तमाम ऐसी ग्राम पंचायतें व अन्य सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित होंगी जहां पर इनकी जनसंख्या काफी कम है। ऐसा ही आरक्षण अन्य वर्गों के लिए भी होगा।

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