बरेली: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर छिड़ी रार, कैसे बढ़ेगी रफ्तार
अमृत विचार, बरेली। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर ढाई साल से चल रही रार रुकने का नाम नहीं ले रही है। इसे लेकर कई बार अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान हो चुकी है। इस बार तो मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया है। मेयर डा. उमेश गौतम द्वारा लगाए गए आरोप से प्रोजेक्ट को …
अमृत विचार, बरेली। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर ढाई साल से चल रही रार रुकने का नाम नहीं ले रही है। इसे लेकर कई बार अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान हो चुकी है। इस बार तो मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया है। मेयर डा. उमेश गौतम द्वारा लगाए गए आरोप से प्रोजेक्ट को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर दो हजार करोड़ रुपये की परियोजना धरातल पर उतरने से पहले विवादों में क्यों घिर गई?
पिछले साल तत्कालीन नगर आयुक्त सैमुअल पाल एन पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की प्रगति धीमी करने को लेकर मामले ने जोर पकड़ा था। उनके कार्यकाल में मेयर ने शिकायत की थी कि बजट होने के बाद भी शहर का विकास नहीं किया जा रहा है। इसी साल सितम्बर माह में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर विवादों से घिरा रहा। मेयर ने निविदा को लेकर शिकायत की थी जबकि शहर विधायक ने भी 163 करोड़ रुपये के टेंडर में होने वाले कार्यों के बारे में सुझाव न लेने पर नाराजगी जाहिर की थी। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और शहर विधायक डा. अरुण कुमार ने कुछ माह पहले बॉटनिकल गार्डन को लेकर आपत्ति जताई थी।
इतना ही नही नियुक्तियों को लेकर भी जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी दौरान मिशन मैनेजर सतीश कुमार की नियुक्ति को लेकर सवाल उठने लगे थे। दिसम्बर 2019 में सवा सौ करोड़ रुपये के घोटाले और सीबीआई जांच में घिरे सतीश कुमार को बरेली स्मार्ट सिटी में मिशन मैनेजर के पद पर नियुक्ति दे दी गई थी। जब ग्रेटर नोएडा में सतीश कुमार की गिरफ्तारी के बाद मामला प्रकाश में आया था। अफसरों के होश उड़ गए। इसके बाद स्मार्ट सिटी के आईटी सेल से जुड़ा होने की चर्चा रही।
सूत्रों की मानें तो एक अधिकारी की नियुक्ति बिना जांच पड़ताल के कर दी गई है। बताया जा रहा है कि आईटी सेल में एक अधिकारी पहले विदेश में एक मल्टीनेशनल कंपनी में थे। वहां टेंडर को लेकर विवादों में आए थे। टेंडर में खेल करने पर कंपनी ने उन्हें बाहर कर दिया था। इसके बाद यही अधिकारी एक दूरसंचार कंपनी में बड़े पद पर रहे।
वहां भी हेराफेरी के आरोप लगे तो उन्हें वहां से भी हटाया गया। अभी एक सप्ताह पहले बिजली के कार्य की निविदा को लेकर एक पत्र वायरल हुआ। जांच में पता चला कि निविदा लेने वाली एक फर्म ने फर्जी अनुभव प्रमाण के जरिए कार्य कराने की योजना बना डाली। इसके बावजूद फर्म को काली सूची में नहीं डाला गया। गुरुवार को एक बार फिर मेयर ने प्रोजेक्ट में हो रहे खेल को लेकर मोर्चा खोल दिया।
