बरेली: कृषि विज्ञान में 'वैभव फेलोशिप' पाने वाला देश का इकलौता राज्य विश्वविद्यालय बना MJPRU

Amrit Vichar Network
Published By Ateeq Khan
On

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के प्रोफेसर बरेली आकर करेंगे शोध और अध्यापन में सहयोग

अमृत विचार : महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) ने शोध के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एग्रीकल्चरल साइंसेसज (कृषि विज्ञान) के क्षेत्र में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग (डीएसटी) से 'वैभव फेलोशिप' पाने वाला पहला देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बना है। डीएसटी की फेलोशिप सूची में देश के शीर्ष 21 शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं-जिनमें अधिकांश आईआईटी और एनआईटी हैं। राज्य विश्वविद्यालय के रूप में एकमात्र एमजेपीआरयू है। इसके अंतर्गत अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के प्रोफेसर ओपी धनखड़ बरेली आकर शोध और अध्यापन में सहयोग करेंगे। 

वैभव फेलोशिप भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका मकसद, प्रवासी भारतीय वैज्ञानिकों को अपनी मिट्टी से जोड़कर, उसके लिए कुछ गुजरने का मौका देना है। इस फेलोशिप के लिए देशभर से 227 शैक्षिक संस्थानों ने आवेदन किया था। विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस विभाग के प्रोफेसर उपेंद्र कुमार और प्रख्यात प्रवासी वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश धनखड़ के संयुक्त मार्गदर्शन में शोध कार्य चलेगा। कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने विश्वविद्यालय की टीम को बधाई देते हुए कहा कि निश्चित रूप से ये बड़ी उपलब्धि है। इससे यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध मानचित्र पर मजबूत पहचान मिलेगी।

कम आर्सेनिक वाले चावल पर रिसर्च

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उपेंद्र कुमार बताते हैं कि चावल की कुछ किस्मों में आर्सेनिक और हैवी मैटल की अत्याधिक मात्रा होती है। इस प्रोजेक्ट के जरिए कम आर्सेनिक और कम हैवी मैटल वाला चावल उत्पादन करना है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की मदद से इस पर शोध कार्य आगे बढ़ेगा। 

खाड़ी देशों से रिजेक्ट हो जाता चावल


प्रोफेसर उपेंद्र कुमार के मुताबिक, अभी देखा जाता है कि भारत का बासमती चावल खाड़ी देशों से रिजेक्ट हो जाता है। वजह, वही आर्सेनिक और हैवी मैटल की निर्धारित मानकों से अधिकता...। हमारी रिसर्च इस पहलू पर आगे बढ़ेगी कि कैसे कम लो-आर्सेनिक वाला चावल उत्पादित किया जाए। प्रोजेक्ट के अंतर्गत 60 लाख रुपये की ग्रांट मिली है।

कृषि छात्रों को शानदार मौका 

यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के प्रोफेसर ओम प्रकाश धनखड़ तीन साल तक, प्रति वर्ष-दो महीने रुहेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस में रहकर अध्यापन और शोध कार्य में सहयोग करेंगे। बीएससी और एमएससी के छात्रों के लिए ये शानदार अवसर होगा। वे, विश्व विख्यात प्रोफेसर के अधीन शोध कार्य और आधुनिक तकनीक सीखकर क्षेत्र के विकास में योगदान दे पाएंगे। 

यूनिवर्सिटी में संचालित कोर्स

रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर और एमएससी एग्रीकल्चर कोर्स संचालित हैं। कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह के नेतृत्व में कैंपस में ये कोर्स प्रारंभ किए गए हैं। रुहेलखंड परिक्षेत्र जहां कृषि का कोई महाविद्यालय नहीं था, वहां इतनी बड़ी उपलब्धि निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र के विकास के लिए काफी अहम मानी जा रही है। 

आईआईटी कानपुर के बाद एमजेपी

वैभव फेलोशिप आवेदन के लिए पहली शर्त ये है कि संस्थान के पास नैक में A++ ग्रेड होनी चाहिए। यूपी से इस फेलोशिप के लिए दो संस्थान चयनित हुए। पहला-आईआईटी कानपुर है और दूसरा रुहेलखंड विश्वविद्यालय।

संबंधित समाचार