गोंडा के कोऑपरेटिव बैंक में 21.47 करोड़ का घोटाला, शाखा प्रबंधक समेत 16 लोगों पर FIR दर्ज

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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गोंडा, अमृत विचार। गोंडा जिले के बड़गांव इलाके में संचालित उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की गोण्डा शाखा में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। बैंक की स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में इस गबन का खुलासा हुआ है।

खुलासे के बाद बैंक के एजीएम की शिकायत पर नगर कोतवाली पुलिस ने इस वित्तीय घोटाले की एफआईआर दर्ज कर ली है। स्पेशल ऑडिट की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर दर्ज मुकदमे में तत्कालीन शाखा प्रबंधक, बैंक कर्मियों और खाताधारकों सहित कुल 16 लोगों को नामजद किया गया है। घोटाले में एफआईआर दर्ज होने के बाद हड़कंप मच गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गयी है। 

उत्तर प्रदेश को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की गोंडा शाखा के सहायक महाप्रबंधक भुवन चंद्र शती के मुताबिक बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल ने बैंक कर्मियों व बाहरी लोगों के साथ मिलकर संगठित गिरोह बनाते हुए शाखा के पांच आंतरिक खातों से 46.13 लाख रुपये अनधिकृत रूप से निकाल लिए।

इसके अलावा 205 खाताधारकों के ऋण व बचत खातों से 2101.65 लाख रुपये विभिन्न बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ट्रांसफर कर कुल 2147.78 लाख रुपये (21.47 करोड़) का गबन कर लिया। जांच में सामने आया है कि शाखा में ऋण स्वीकृति और वितरण के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड तथा बैंक की आंतरिक नीतियों के नियमों की खुली अनदेखी की गई। फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ऋण बांटे गए और खाताधारकों की जमा धनराशि को सुनियोजित ढंग से दूसरे खातों में अंतरित किया गया।

आरोप है कि घोटाले में शामिल लोगों ने अपने और परिजनों के खातों का उपयोग कर धनराशि हड़पी। ऋण की रकम से ही किश्तें जमा कर खातों को एनपीए घोषित होने से बचाया गया, ताकि मामला लंबे समय तक दबा रहे। एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र, पद के दुरुपयोग और विश्वासघात जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। बैंक प्रबंधन का कहना है कि यह पूरा कृत्य बैंक के जमाकर्ताओं के हितों के विरुद्ध किया गया संगठित आर्थिक अपराध है।

वहीं नगर कोतवाल विंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया की बैंक के  तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल समेत कुल 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है। पुलिस बैंक खातों, दस्तावेजों और धन के प्रवाह की गहन जांच कर रही है।

इनके खिलाफ दर्ज करायी गई एफआईआर

पवन कुमार पाल – तत्कालीन शाखा प्रबंधक
अजय कुमार – तत्कालीन शाखा प्रबंधक
सुशील कुमार गौतम – तत्कालीन प्रबंधक
पवन कुमार – तत्कालीन सहायक/कैशियर
सुमित्रा पाल – खाताधारक
संजना सिंह – खाताधारक
राज प्रताप सिंह – खाताधारक
जय प्रताप सिंह – खाताधारक
फूल मोहम्मद – खाताधारक
राघव राम – खाताधारक
शिवाकान्त वर्मा – खाताधारक
रितेन्द्र पाल सिंह – खाताधारक
गीता देवी वर्मा – खाताधारक
दुष्यन्त प्रताप सिंह – खाताधारक
मोहम्मद असलम – खाताधारक
प्रतीक कुमार सिंह – खाताधारक

खाताधारक के तरफ से भी प्रबंधक के खिलाफ दर्ज करायी गई एफआईआर

इसी मामले नें एक खाता धारक के तरफ से भी तत्कालीन शाखा प्रबंधक ते खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गयी है। खाता धारक शिवेन्द्र दूबे निवासी बहलोलपुर के अनुसार उन्होंने आवास निर्माण के लिए कोऑपरेटिव बैंक बड़गांव से 9 लाख रुपये का होम लोन लिया था और वह नियमित रूप से किस्तें जमा कर रहे थे।

इसी बीच बैंक जाने पर  ज्ञात हुआ कि उनके ऋण खाते में स्वीकृत राशि को अनधिकृत रूप से बढ़ाकर 31 लाख रुपये दर्शा दिया गया है। इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराने पर बैंक प्रबंधन ने पहले इसे त्रुटिवश होना बताया लेकिन बाद में बैंक के तत्कालीन प्रबंधक पवन पाल सिंह एवं उनके सहयोगियों ने उन्हें धमकाने और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।

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