जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पास नहीं बिना मान्यता वाले मदरसे बंद करने का अधिकार : इलाहाबाद हाईकोर्ट
-श्रावस्ती के मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रजा केस की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मदरसा खुलवाने का दिया निर्देश
अमृत विचार : बगैर मान्यता वाले मदरसे-जिन्हें अवैध घोषित करते हुए बंद कर दिया जाता है। उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा संरक्षण मिला है। श्रावस्ती के मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा केस की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि, कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को राज्य में संचालित बिना मान्यता वाले मदरसों को बंद करने का अधिकार दे।
श्रावस्ती के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा को बिना मान्यता के आधार पर बंद करा दिया था। मदरसा प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील की।
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हाईकोर्ट में प्रकरण की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने मदरसे की पैरवी करते हुए कहा कि, बिना मान्यता वाला मदरसा राज्य से किसी मदद का हकदार नहीं होगा। उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियमन, 2016 के रेगुलेशन का हवाला देते हुए कहा कि केवल मान्यता न होने से मदरसे को बंद नहीं किया जा सकता।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि,''वह इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि रेगुलेशन में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो अधिकारियों को इस आधार पर मदरसे के कामकाज को रोकने का अधिकार दे कि उसे मान्यता नहीं मिली है।''
हाईकोर्ट ने बंद मदरसे को खुलवाने का निर्देश देते हुए कहा कि, "मदरसा तब तक किसी भी सरकारी ग्रांट का दावा करने का हकदार नहीं होगा जब तक उसे मान्यता नहीं मिल जाती। मदरसा शिक्षा बोर्ड याचिकाकर्ता मदरसे के स्टूडेंट्स को मदरसा बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं होगा।
