नीट पीजी-2025 की अर्हता कट-ऑफ में बदलाव मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड द्वारा नीट पीजी 2025 की अर्हता कट-ऑफ में की गई बड़ी कटौती को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दाखिल की गई है। अधिवक्ता अभिनव गौर की ओर से दाखिल याचिका में सामान्य वर्ग के लिए कट-ऑफ 50 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्गों के लिए 40 प्रतिशत से शून्य प्रतिशत किए जाने के निर्णय को मनमाना और जनहित के प्रतिकूल बताया गया है।
इलाहाबाद न्यायपीठ की रजिस्ट्री में याचिका पंजीकृत कर ली गई है, हालांकि सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। बोर्ड ने 13 जनवरी को जारी नोटिस में कहा था कि कट-ऑफ में कमी का फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप लिया गया। संशोधित मानदंडों के तहत सामान्य वर्ग के लिए कट-ऑफ स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया है, जबकि एससी/एसटी/ओबीसी के लिए यह 235 से घटाकर माइनस 40 हो गया है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि जो अभ्यर्थी राष्ट्रीय स्तर की मानकीकृत परीक्षा में न्यूनतम चिकित्सा ज्ञान भी प्रदर्शित नहीं कर पाते, उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा भूमिकाओं के लिए योग्य नहीं माना जा सकता। ऐसे अपर्याप्त रूप से प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टरों से मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम होता है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि नकारात्मक अंकों के आधार पर प्रवेश पाने वाले उम्मीदवारों की योग्यता में पाठ्यक्रम के दौरान स्वतः सुधार मान लेना अव्यावहारिक है। इसके अलावा कट-ऑफ में यह कटौती वैध सकारात्मक कार्रवाई से असंबंधित होकर “मनमानी, अनुचित और अत्यधिक जाति-आधारित भेदभाव” को बढ़ावा देती है, जिससे संवैधानिक समानता प्रभावित होती है। जनहित याचिका में कोर्ट से बोर्ड के निर्णय के अनुपालन में किसी भी कार्रवाई पर रोक लगाने तथा 13 जनवरी के फैसले के आधार पर की गई सभी दाखिलों को निरस्त घोषित करने की मांग की गई है।
