UP की आबकारी नीति बनी राष्ट्रीय मॉडल, कई राज्यों के अधिकारियों ने किया अध्ययन

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी और पारदर्शी आबकारी नीति ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। लगातार रिकॉर्ड वृद्धि के साथ राज्य की आबकारी राजस्व व्यवस्था अब एक राष्ट्रीय सफलता मॉडल के रूप में उभर चुकी है, जिसे अन्य राज्य अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश समेत छह से अधिक राज्यों के आबकारी आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश पहुंचकर राज्य की आबकारी नीति का गहन अध्ययन किया। 

अध्ययन के दौरान अधिकारियों ने नीति निर्माण, ई-गवर्नेंस, लाइसेंस प्रक्रिया और राजस्व वृद्धि में सहायक निगरानी तंत्र पर विस्तृत चर्चा की। कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों ने उत्तर प्रदेश की व्यावहारिक और राजस्व-केंद्रित आबकारी नीति की सराहना की है और इसे अपने राज्यों में लागू करने पर विचार कर रहे हैं। दौरे के दौरान विभिन्न राज्यों के अधिकारियों ने प्रदेश की डिस्टिलरी और शराब दुकानों का निरीक्षण भी किया। 

उन्होंने उत्पादन से लेकर बिक्री तक की निगरानी व्यवस्था को समझा और यह भी देखा कि किस तरह अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली, ई-लॉटरी के माध्यम से दुकानों का आवंटन, बारकोडिंग और स्टॉक प्रबंधन प्रणाली की सराहना की। अधिकारियों का कहना था कि इन तकनीकी उपायों से न केवल आबकारी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी प्रभावी अंकुश लगा है। 

आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न राज्यों के आबकारी विभागों के अधिकारी लगातार उत्तर प्रदेश आकर नीति, प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी नवाचारों का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अन्य राज्यों के अधिकारी हमारी आबकारी नीति की कार्यप्रणाली को समझ रहे हैं ताकि वे अपने-अपने राज्यों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू कर सकें।"  

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