लखनऊ : मुसहर, वनटांगिया, बुक्सा और बावरिया बने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत

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Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश के मुसहर, वनटांगिया, बावरिया और बुक्सा जैसे वंचित समुदाय, जिन्हें कभी समाज के सबसे निचले पायदान पर माना जाता था, आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी नीतियों और लक्षित प्रयासों से इन वंचित समुदाय की महिलाएं और पुरुष आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ चुके हैं। सरकार की योजनाओं ने इन परिवारों को न केवल आजीविका दी, बल्कि सम्मान और पहचान भी दिलाई है।

मुख्यमंत्री योगी का स्पष्ट संदेश है कि प्रदेश तभी ‘उत्तम प्रदेश’ बनेगा, जब समाज का अंतिम व्यक्ति सशक्त होगा। इसी सोच के तहत इन समुदायों को स्वयं सहायता समूहों, स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड से जोड़ा गया है, जिससे वे साहूकारों पर निर्भरता से मुक्त होकर खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें। सरकार की रणनीति है कि योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के दरवाजे तक पहुंचे।

2843 ग्राम पंचायतों में मुसहर समुदाय की नई शुरुआत

मुसहर समुदाय के उत्थान के लिए प्रदेश की 2843 ग्राम पंचायतों में विशेष अभियान चलाया गया। इसके तहत 1896 विशिष्ट मुसहर समूहों का गठन किया गया। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इन परिवारों को स्वरोजगार, अनुदान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया, जिससे दशकों पुराना गरीबी और पलायन का चक्र टूटने लगा है।

वनटांगिया और बुक्सा समुदाय का जंगल से बाजार तक सफर

वन क्षेत्रों में बसे वनटांगिया समुदाय के 496 समूहों का गठन कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया है। इन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने के साथ आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ा गया। वहीं, बुक्सा जनजाति के 548 सदस्यों को समूहों में संगठित कर उनके पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़ा गया, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बावरिया समुदाय को मिला आयुष्मान कार्ड समेत सरकारी योजनाओं का लाभ

घुमंतू जीवन जीने वाले बावरिया समुदाय के 2346 परिवारों को पहली बार संगठित कर आवास, आयुष्मान कार्ड, राशन और पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ दिया गया है। सरकार का उद्देश्य इन्हें स्थायी रूप से बसाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

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