यूजीसी के नई नियमावली पूरी तरीके से सनातन विरोधी है, अविमुक्तेश्वरानंद ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप
वाराणसी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नई नियमावली ने पूरे देश में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रयागराज से काशी लौटे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार को यूजीसी के इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार सनातन धर्म को बांटना चाहती है तथा एक जाति को दूसरी जाति से लड़वाना चाहती है। नई नियमावली पूरी तरह सनातन विरोधी है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में न्याय की कोई आशा नहीं दिखती और देश को यही संदेश जा रहा है। पूरे देश ने देखा कि किस तरह बटुकों की चोटी पकड़कर उनका अपमान किया गया। सरकार और प्रशासन का चेहरा सबके सामने आ गया है। न तो उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और न ही सुधार का कोई प्रयास किया।
यूजीसी की नई नियमावली पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ये नियम जानबूझकर इस उद्देश्य से लाए गए हैं ताकि वास्तविक कमियों पर चर्चा न हो सके। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की व्यवस्था में जातियां संघर्ष के लिए नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों की आजीविका और संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई थीं। इस कानून के बाद सरकार आखिर देश में क्या कराना चाहती है?
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि यूजीसी के माध्यम से एक जाति को दूसरी जाति के सामने खड़ा कर दिया गया है, जिससे समाज में टकराव बढ़ेगा। इससे आपसी संघर्ष बढ़ेगा और अंततः नुकसान पूरे हिंदू समाज को होगा। यह एक ही हिंदू समुदाय को बांटने वाला कानून है।
