80 फीसद महिलाओं को नहीं होती है ब्रेस्ट कैंसर की जानकारी, अभी से जान लें ये लक्षण
लखनऊ, अमृत विचार: ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियों में से एक है, लेकिन इसके बावजूद देश में आज भी अधिकांश महिलाएं इसके प्रति जागरूक नहीं हैं। करीब 80 प्रतिशत महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखतीं और लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं बीमारी के एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचती हैं। यह जानकारी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में बुधवार को आयोजित ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस प्रोग्राम में इंडोक्राइन विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा ने दी।
डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि महिलाओं के संपर्क में सबसे पहले नर्स, आशा बहुएं और एएनएम आती हैं। ऐसे में इन सभी का ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान इन्हें ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण, शुरुआती संकेत और समय पर जांच की जरूरत के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, ताकि वे गांव और समुदाय स्तर पर महिलाओं को सही मार्गदर्शन दे सकें।
ब्रेस्ट कैंसर को कैसे पहचानें?
डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि छाती में बिना दर्द की गांठ बनना, दोनों छातियों के आकार या बनावट में बदलाव, त्वचा पर लाल चकत्ते, निप्पल से खून या किसी तरह का असामान्य स्राव होना इसके मुख्य संकेत हैं। इन लक्षणों के दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
शुरुआत में ही पता चले इसके लिए जागरूकता जरूरी
उन्होंने कहा कि केजीएमयू में इलाज के लिए आने वाली करीब 60 प्रतिशत महिलाएं एडवांस स्टेज की ब्रेस्ट कैंसर मरीज होती हैं। कई मामलों में गांठ काफी बड़ी हो चुकी होती है और संक्रमण भी फैल चुका होता है। अगर ब्रेस्ट कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो इसका इलाज काफी आसान और प्रभावी हो सकता है। इसके लिए महिलाओं में जागरूकता बढ़ाना सबसे जरूरी है।
महिलाओं में सोशल आइसोलेशन का डर
डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि जब वे मरीजों से पूछते हैं कि पहले डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाया, तो कई महिलाएं बताती हैं कि घर में बताने पर उन्हें अलग-थलग कर दिया जाता है। आज भी कुछ जगहों पर ब्रेस्ट कैंसर को छुआछूत की बीमारी माना जाता है, जो पूरी तरह गलत है और इसी डर की वजह से महिलाएं समय पर इलाज नहीं करवा पातीं।
स्क्रीनिंग ही एकमात्र विकल्प
उन्होंने बताया कि 40 साल से ऊपर की महिलाओं को हर दो साल में एक बार ब्रेस्ट कैंसर की जांच करानी चाहिए, जबकि 50 साल से 65 साल तक की महिलाओं को साल में एक बार जांच जरूर करानी चाहिए। जागरूकता अभियानों का उद्देश्य यही है कि जो महिलाएं नियमित जांच नहीं करवा पा रही हैं, वे कम से कम लक्षणों को पहचान सकें और समय पर जांच कराएं। साथ ही स्वस्थ रहने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करना भी बेहद जरूरी है।
