संपादकीय: दुर्घटना और सवाल
महाराष्ट्र को उपमुख्यमंत्री के बतौर सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अजित पवार का हवाई दुर्घटना में निधन अत्यंत दुखद है। उनके साथ स्टॉफ पायलट, को-पॉयलट समेत पांच लोगों की मृत्यु ने कई असहज प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ऐसे में सीबीआई और अन्य तकनीकी एजेंसियों द्वारा गहन जांच की मांग को ‘राजनीति प्रेरित’ करार देना उचित नहीं।
किसी भी वीआईपी विमान हादसे में पारदर्शी, बहु-एजेंसी तथ्य-आधारित और समयबद्ध जांच विश्वास बहाली का आवश्यक साधन होती है। लीयरजेट अपेक्षाकृत सुरक्षित जेट विमान माने जाते हैं। संबंधित भारतीय निजी कंपनी को भी डीजीसीए के फरवरी 2025 के ऑडिट में बेदाग पाया गया था। मुख्य पायलट के 15 हजार घंटे और सह-पायलट के 1500 घंटे का अनुभव कम नहीं है। अंतिम क्षणों में विमान गिर पड़ा।
यह परिदृश्य तीन आशंकाओं की ओर इशारा करता है। पहला- अचानक तकनीकी खराबी जैसे कंट्रोल सरफेस या हाइड्रोलिक्स या इंजन का असंतुलन, दूसरा-माइक्रोबर्स्ट या विंड-शियर जैसी चुनौती, तीसरा- अंतिम क्षण में निर्णय या कॉन्फ़िगरेशन की त्रुटि। निष्कर्ष के लिए एफडीआर-सीवीआर विश्लेषण ही निर्णायक होगा, लेकिन एयर इंडिया की त्रासदी के महज सात महीने बाद यह हादसा उड्डयन सुरक्षा पर सवाल तो खड़े ही करता है। देश में रोज़ाना पांच लाख से अधिक यात्री उड़ान भरते हैं। हवाई यात्रा अब भी सबसे सुरक्षित परिवहन है, पर जुलाई 2012 से नवंबर 2025 के बीच 112 एक्सीडेंट और 128 गंभीर घटनाएं दर्ज हुईं; छोटे विमानों में जानलेवा हादसों की दर वाणिज्यिक विमानों से 10 से 50 गुना अधिक बताई जाती हैं।
इसका अर्थ है कि जनरल एविएशन के मानक शायद छोटे विमानों के लिए कमर्शियल एविएशन के समकक्ष कठोर नहीं हैं। लीयरजेट-45 के 1998 से अब तक आठ बड़े हादसों और 29 मौतों का रिकॉर्ड, तथा सितंबर 2023 में मुंबई में रनवे से फिसलने की घटना, जिसकी जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है, पारदर्शिता की कमी की ओर संकेत करती है। समय पर रिपोर्ट सार्वजनिक होती, तो सुधारात्मक कदम और सीख सामने आते। बारामती एयरपोर्ट की लोकेशन, सीमित संसाधन और बार-बार प्रशिक्षण विमानों की दुर्घटनाएं यह संकेत है कि बुनियादी ढांचे और जोखिम-आकलन में तत्काल सुधार जरूरी है। मैंगलोर, कोझिकोड, इंफाल, लेह जैसे चुनौतीपूर्ण हवाई अड्डों पर रनवे सेफ्टी एरिया, ईएमएएस, उन्नत आईएलएस और जीपीएस-आधारित एप्रोच, रियल-टाइम वेदर रडार और विंड-शियर अलर्ट अनिवार्य किए बिना नित नए एयरपोर्ट खोलना विवेकपूर्ण नहीं है।
डीजीसीए को जनरल एविएशन के लिए अनिवार्य सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम, डेटा-शेयरिंग, थर्ड-पार्टी ऑडिट, पुराने विमानों की चरणबद्ध समीक्षा, सिम्युलेटर-आधारित प्रशिक्षण की न्यूनतम घंटों की बाध्यता और ‘नो-फॉल्ट’ सेफ्टी रिपोर्टिंग संस्कृति को सख्ती से लागू करना चाहिए। सरकार को एएआई और राज्यों के साथ मिलकर इस दिशा में प्राथमिकता तय करके काम करना होगा, पहले सुधार, फिर विस्तार। यदि इससे सबक लेकर सुरक्षा ढांचा सुदृढ़ किया जाए, तो यही दुर्घटना के दिवंगतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
