आयुष्मान योजना में बड़े घोटाले की संभावना: जांच के घेरे में कई निजी अस्पताल, लखनऊ के सीएमओ स्तर से जांच शुरू
लखनऊ, अमृत विचार : आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के 18 जिलों में निजी अस्पतालों द्वारा गंभीर अनियमितताएं किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इन अस्पतालों ने उपलब्ध आईसीयू और वेंटिलेटर बेड से अधिक मरीजों की भर्ती दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद स्टेट हेल्थ एजेंसी आयुष्मान भारत (साचीज) ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। इसके तहत लखनऊ के आठ निजी अस्पतालों में सीएमओ स्तर से जांच शुरू कर दी गई है।
लखनऊ में आयुष्मान योजना से 400 से अधिक निजी और सरकारी अस्पताल संबद्ध हैं, जहां पात्र लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। योजना के तहत आईसीयू वेंटिलेटर बेड के लिए 9,900 रुपये और बिना वेंटिलेटर आईसीयू बेड के लिए 9,350 रुपये प्रति दिन का पैकेज निर्धारित है। सूत्रों के अनुसार, कुछ निजी अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर बेड लगभग हर समय ‘फुल’ दिखाए गए।
कई मामलों में उपलब्ध बेड से अधिक मरीजों की भर्ती दर्शाई गई। भुगतान के लिए फाइल आगे बढ़ने पर साचीज को इस पर संदेह हुआ। इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को साचीज ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जांच कराने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी के निर्देश पर 22 जनवरी 2026 को सीएमओ लखनऊ को पत्र भेजकर आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों में आईसीयू-वेंटिलेटर बेड के संचालन की स्थिति की जांच के आदेश दिए गए। सीएमओ डॉ. एनबी. सिंह ने जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
18 जिलों के अस्पताल संदेह के घेरे में
आगरा, आजमगढ़, बहराइच, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, देवरिया, गोरखपुर, जौनपुर, लखनऊ, मथुरा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, सहारनपुर, संतकबीर नगर, शामली और वाराणसी के आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों में आईसीयू-वेंटिलेटर भर्ती में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
