बरेली: चार पीसीएस अफसरों के विरुद्ध मिले भ्रष्टाचार के सुबूत, नहीं हुई कार्रवाई
बरेली, अमृत विचार। सितारगंज-बरेली एनएच-74 के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए फर्जीवाड़े में चार पीसीएस अफसरों के खिलाफ पूर्व में हुई जांच में भ्रष्टाचार के कई सुबूत मिल चुके हैं लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। शासन स्तर पर भी वरिष्ठ अधिकारी जांच रिपोर्ट दबाए बैठे हैं। दूसरी जांच भी किसी नतीजे …
बरेली, अमृत विचार। सितारगंज-बरेली एनएच-74 के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए फर्जीवाड़े में चार पीसीएस अफसरों के खिलाफ पूर्व में हुई जांच में भ्रष्टाचार के कई सुबूत मिल चुके हैं लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। शासन स्तर पर भी वरिष्ठ अधिकारी जांच रिपोर्ट दबाए बैठे हैं। दूसरी जांच भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। जांच अधिकारी 200 फाइलों में महज 20 फाइलें ही देख पाए हैं। सूत्र बता रहे हैं कि दोषी अफसरों को शासन में बैठे एक वरिष्ठ अधिकारी का संरक्षण मिला हुआ है।
पूर्व में हुई जांच में यह भी स्पष्ट हो गया था कि 900 रुपये प्रति वर्ग मीटर भूमि खरीदने की जगह किसानों से सांठगांठ कर अफसरों ने भूमि कॉमर्शियल में दिखाकर 4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से खरीदी है। खेल से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। तत्कालीन मंडलायुक्त डा. पीवी जगनमोहन ने जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए चारों अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को भी रिपोर्ट भेजी थी लेकिन अफसरों के खिलाफ आज तक कार्रवाई नहीं हुई है।
26 फरवरी को कलेक्ट्रेट के निरीक्षण में मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने घोटाले की फाइल निकलवाई, तब एक-दो पन्ने भी गायब मिले। पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ तैयार की गयी फाइल देखकर मंडलायुक्त ने नाराजगी जताई और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय के बाबुओं पर फाइल दबाने की बात कही थी। मंडलायुक्त ने प्रकरण में फिर से जांच कराने के आदेश दिये थे। जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व प्रकरण की जांच कर रहे हैं। जांच की प्रगति की बात करें तो मार्च से लेकर अब तक महज खानापूर्ति हुई है। कोविड काल में जांच लटकी रही।
इधर, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि एनएच के चौड़ीकरण में हुए फर्जीवाड़े से जुड़ी 200 फाइलें हैं। बहेड़ी तहसील क्षेत्र के हथमना, माधौपुर और सिरसा गांव के 200 से अधिक किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। अब तक महज 20 फाइलों की पड़ताल हुई है। कृषि भूमि की 143 कराकर गैरकृषि भूमि में बदलने का आदेश एसडीएम कोर्ट का है। हर पहलू पर गौर कर जांच की जा रही है। मामला पुराना है। वर्ष 2012-13 में बरेली-सितारगंज हाईवे को सात से 10 मीटर चौड़ा करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) को प्रशासन ने बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहित कराई थी। प्रकरण में पीसीएस अफसर मनीष कुमार नाहर, कुंवर पंकज, पुष्पा देवरार और लक्ष्मी शंकर सिंह के खिलाफ जांच की गई थी।
अगस्त में शासन ने चारों अफसरों के कार्यकाल की मांगी थी सूचना
शासन ने अगस्त माह में चारों अफसरों के जनपद में तैनाती की पूरी जानकारी मांगी थी। इसमें पीसीएस लक्ष्मी शंकर सिंह 14 सितंबर 2012 से लेकर 9 सितंबर, 2014 तक जनपद में तैनात रहे थे। मनीष कुमार नाहर 15 जुलाई 2013 से लेकर 19 जनवरी 2016 तक तैनात रहे। 8 सितंबर 2014 से लेकर 13 मार्च 2018 तक पीसीएस कुंवर पंकज तैनात रहे थे जबकि पुष्पा देवरार 28 जून, 2014 से लेकर 13 सितंबर, 2016 तक जिले में तैनात रहीं। ये सभी अधिकारी एसडीएम, एसीएम प्रथम, द्वितीय, तृतीय और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी भी रह चुके हैं। इन सभी के कार्यकाल में फर्जीवाड़ा होने की बात सामने आई है।
