कुमाऊंनी परिधान को किराए पर देकर ही चल रहा रोजगार, हजारों के मोबाइल के आगे लाखों के कैमरे फेल

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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गौरव जोशी/ नैनीताल। स्मार्ट मोबाइलों के इस दौर में नैनीताल में सैलानियों की फ़ोटो खींचने वाले फोटोग्राफर्स का काम अंतिम दौर पर चल रहा है। अब फोटोग्राफर्स कुमाऊंनी व कश्मीरी परिधान को किराए पर देकर ही किसी तरह अपना रोजगार चला रहे हैं। वहीं लोग परिधान को किराए पर लेकर मोबाइल में फोटो खींच अपने शौक पूरे कर रहे हैं।

बता दें कि नैनीताल में वर्षभर सैलानियों की आवाजाही लगी रहती है। यहां आने वाले सैलानी यहां आकर झील किनारे जरूर पहुंचते हैं। वहीं झील किनारे लटके कुमाऊंनी व कश्मीरी परिधान भी पर्यटकों को अकर्षित करती हैं। जिनसे वहां मौजूद फोटोग्राफर्स को रोजगार मिलता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में स्मार्ट मोबाइल का प्रचलन बढ़ने से फोटोग्राफर्स का रोजगार प्रभावित हो रहा है।

पहले एक दिन में सौ से ज्यादा पर्यटक फोटोग्राफर्स से फोटो खींचाने पहुंचते थे। लेकिन अब लोग अपने मोबाइल से ही फोटो खींचना पसंद करते हैं। अब आलम यह है कि एक फोटोग्राफर्स का एक फोटो खींचना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कई लोगों ने फोटोग्राफी का काम छोड़ दिया है। वहीं कुछ फोटोग्राफर अब मल्लीताल झील किनारे कुमाऊंनी व कश्मीरी परिधानों को किराए पर देकर अपना रोजगार चला रहे हैं। लेकिन यह रोजगार फोटोग्राफर्स के घर चलाने के लिए नाकाफ़ी नजर आ रहे हैं। जिसके चलते अब गिने चुने फोटोग्राफर ही यहां फोटोग्राफी कर रहे हैं।

मोबाइलों के प्रचलन के बाद फोटोग्राफर का काम ठप हो गया है। अब पर्यटक परिधानों को किराए पर लेकर सैल्फी लेना ही पसंद कर रहे हैं। दिन में दो या चार पर्यटक फोटो खिंचवाने आ जाते हैं। अब परिधानाें को किराए पर देकर ही रोजगार कर रहे हैं...अकरम खान, स्थानीय फोटोग्राफर।

रील वाले कैमरों के दौर में फोटोग्राफरों का काम बहुत अच्छा था। लोग अब मोबाइलों से फोटो खींचना पसंद कर रहे हैं। अब ड्रेस किराए पर देकर ही किसी तरह गुजारा कर रहे हैं... नरेश भारती, स्थानीय फोटोग्राफर।

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