Bareilly: भारत रंग महोत्सव के मंच पर मीता पंचलैट वाले ने बांधा समां

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। असमानता, विपन्नता और कमतर होने से उपजे एहसास को कम करने का सफल प्रयास जब अपने चरम पर जाता है तब उपजती है कहानी पंचलाइट। फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा लिखी गई कालजयी कहानी को नई नजर से मंच पर लाने का प्रयास किया है। जिसे हमने नाम दिया है, मीता पंचलैट वाले नाटक में तीसरी कसम कहानी से महुआ घटवारन का प्रसंग भी कथा का हिस्सा है।

नाटक में अपने होने का सिंबॉलिज्म गोधन और मुनरी की प्रेमकथा में खोजता है लेकिन सफल प्रेम के संदर्भ में रचनात्मक स्वतंत्रता का प्रयोग करते हुए नाटक में कुछ घटनाएं, चरित्र और भावों का प्रयोग किया गया है जो मूल कहानियों का हिस्सा नहीं हैं। आशा है दर्शकगण हृदय से इसे स्वीकार करेंगे। आज सब तरह से सम्पन्न होते हुए भी हम खोजते हैं कुछ ऐसा जो हमें खुश रख सके। यह दौड़, यह खोज हमें और अकेला कर देती है।

इस थकान में जब हम पर हावी है सोशल मीडिया, काम का बोझ, दूसरों से आगे निकलने का दबाव, खुद को साबित करने की महत्वाकांक्षा। ऐसे में कहीं पीछे, बहुत पीछे छूट जाता है जीवन का आनंद, रस, सुकून और ठहराव। एक समय था जब इस देश में बहुत कम शहर थे और गांव ज्यादा। जब शहर में पहुंचकर भी दरअसल गांव ही बसता था। जब लोग एक साथ रहते थे, बात करते थे, लड़ते-झगड़ते थे, फिर भी साथ होते थे। दिलों में मासूमियत थी, चेहरों पर एक भोलापन। इस नाटक में हम उस समय को कहने जा रहे हैं जैसे कि कोई समय-यात्रा हो। हममें से बहुतों ने वो समय नहीं देखा है। लेकिन कल्पना तो की जा सकती है। 

हमारे पास महान लेखकों की एक लंबी श्रृंखला है जो हमारे लिए इतिहास की विरासत लिख गए हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां उसे पढ़ें और उस समय को याद रखें, समझें व किताबों, कहानियों या नाटकों के जरिए ही सही वो समय जीने की कोशिश करें। नाटक में अभिनय गोधन का शोभित गंगवार, मुनरी का आशी सिंह, गुलरी चाची का माधुरी कश्यप, अमरपाल, नौटंकी दर्शक, मेला दुकानदार, मुनीश रत्न ने किया। नाटक मंचन के दौरान उद्यमी तनुज भसीन, संदीप झावर, बंटी खान, नितिन मोदी मौजूद रहे।

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