जलालाबाद: दिल्ली से लौटे युवक की संदिग्ध अवस्था में मौत
अमृत विचार, जलालाबाद। दो दिन पूर्व दिल्ली से घर के लिए निकला युवक देर रात जरीनपुर चौराहा स्थित होटल के पास संदिग्ध अवस्था मे पड़ा मिला था। होटल स्वामी की सूचना पर परिजन उसे घर ले आये थे दो दिन तक सुध बुध खोए युवक की रविवार की सुबह मौत हो गई। जिससे परिजनों में …
अमृत विचार, जलालाबाद। दो दिन पूर्व दिल्ली से घर के लिए निकला युवक देर रात जरीनपुर चौराहा स्थित होटल के पास संदिग्ध अवस्था मे पड़ा मिला था। होटल स्वामी की सूचना पर परिजन उसे घर ले आये थे दो दिन तक सुध बुध खोए युवक की रविवार की सुबह मौत हो गई। जिससे परिजनों में कोहराम मच गया। फिलहाल परिजनों ने पुलिस से शिकायत किये बिना ही अंतिम संस्कार की तैयारी की है।
जलालाबाद के मोहल्ला मदननगर निवासी योगेंद्र कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू जलालाबाद में ही रेडीमेड दुकान पर काम कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। उनके दो पुत्र केतन मिश्रा और ऋषभ मिश्रा व एक पुत्री आयुषी है जिसमें केतन और आयुषी की शादी हो चुकी है। केतन और ऋषभ (24) दिल्ली एनसीआर में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं।
ऋषभ गाज़ियाबाद के एक निजी अस्पताल में वार्डब्वॉय की नौकरी कर रहा था। गाज़ियाबाद में ही उसकी जान पहचान लाल कुआं निवासी एक एम्बुलेंस चालक से हो गई। ऋषभ उस एम्बुलेंस चालक के परिवार के साथ किराया देकर रहने लगा। ऋषभ के पिता ने बताया कि साथ रहते रहते मेलजोल बढ़ा तो ऋषभ का एम्बुलेंस चालक से पैसों का लेन देन शुरू हो गया। 16 दिसंबर को ऋषभ ने पिता को फोन कर बताया कि उसका लगभग डेढ़ लाख रुपया एम्बुलेंस चालक पर बकाया है। मांगने पर टालमटोल कर देता है आप जरूरी काम बता कर पैसे के लिए कहो। पिता के द्वारा पैसे मांगने पर एम्बुलेंस चालक ने 10-15 दिन में पैसे लौटा देने का वादा कर दिया।
उसके दो दिन बाद एम्बुलेंस चालक का फोन आया और उसने बताया कि ऋषभ की तबीयत खराब होने पर उसने ऋषभ को दवा दिलाकर घर वापसी के लिए बस पर बिठा दिया है। देर रात तक परिजन ऋषभ का इंतेजार करते रहे लेकिन ऋषभ घर वापस नही आया और न ही फोन पर कोई सम्पर्क हो सका। रात लगभग 12 बजे एक फोन आया, फोन करने वाले ने बताया कि वह जरीनपुर चौराहा स्थित होटल का मालिक बोल रहा है उसके होटल के सामने एक युवक जो अपना नाम ऋषभ बता रहा है पड़ा हुआ है। उसने ही फोन करने को कहा है आप लोग जल्दी आकर युवक को ले जाओ।
आनन फानन में पप्पू मिश्रा किराए की गाड़ी से पुत्र को घर ले आये। पिता के अनुसार ऋषभ कुछ भी बोलने बताने की स्थिति में नही था। घर लाने के बाद उसको जलालाबाद के ही एक निजी चिकित्सक को दिखाया। दो दिन तक ऋषभ घर में किसी से कुछ नही बोला। उसका मोबाइल भी बुरी तरह से टूटा हुआ था। न ही उसके पास कोई बैग मिला न ही शरीर पर गर्म कपड़े सिर्फ एक पैंट शर्ट में दिल्ली से यहां तक आ गया। जोकि संदिग्ध है, ऋषभ पिछले ढाई साल से दिल्ली में रह रहा था।
आखरी बार होली पर दिल्ली से लौटा था ऋषभ
ऋषभ के पिता पप्पू ने बताया कि ऋषभ दिल्ली में अच्छी तरह से सेटल हो गया था। वह केवल होली दिवाली ही घर आता था। वहां उसको कोई समस्या नहीं थी। पूरा कोरोना काल ऋषभ दिल्ली में ही बिना किसी परेशानी रहा। आखरी बार ऋषभ होली में घर आया था 10 मार्च को घर आकर सिर्फ तीन दिन रुककर 12 को दिल्ली वापस चला गया। इस दौरान उसने कभी किसी बीमारी या तकलीफ के बारे में घर पर नही बताया। अचानक इतनी तबीयत खराब हो जाना मुश्किल है कि उसकी जान पर बन आये। वह कुछ समझ नही पा रहे कि असलियत में क्या हुआ होगा ऋषभ ने भी उन्हें कुछ नहीं बताया।
जहरखुरानी, सर्दी या किसी षड्यंत्र का शिकार हुआ युवक
क्या दो दिन में किसी की अचानक इतनी तबीयत बिगड़ सकती है कि उसकी मौत हो जाये? शायद नही मगर ऋषभ के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। जो भी लोग ऋषभ की मौत की सूचना पर घर आ रहे हैं सब यही कह रहे हैं कि या तो ऋषभ किसी जहरखुरानी का शिकार हुआ होगा या बिना कपड़ों के दिल्ली से यहां तक आने की वजह से सर्दी की वजह से भी मौत सम्भव है। मगर मोबाइल टूटा होने और एम्बुलेंस चालक पर डेढ़ लाख उधारी किसी षड्यंत्र की ओर भी इशारा कर रही है।
