पीलीभीत: : एक करोड़ के गबन मामले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और उसकी पत्नी पर FIR 

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Published By Monis Khan
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पीलीभीत, अमृत विचार।  डीआईओएस दफ्तर में बाबूगिरी करने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा अपनी पत्नी के बैंक खातों में एक करोड़ रुपये सरकारी धनराशि भेजने के गंभीर मामले में डीएम के निर्देश पर सख्त एक्शन लिया गया है। डीआईओएस राजीव कुमार सिंह की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी इल्हाम उर्रहमान शम्सी और  उसकी पत्नी अर्शी खातून के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, आरोपी की संपत्ति की जांच के भी निर्देश डीएम की ओर से दिए गए हैं। 

बता दें कि मूल रूप से बीसलपुर के जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम उर्रहमान शम्सी करीब सात साल से अधिक समय से डीआईओएस दफ्तर में बाबूगिरी कर रहा था। बीते दिनों उसकी पत्नी अर्शी खातून के खाते में एक करोड़ से अधिक सरकारी रकम निकली थी। बैंक ने संदिग्ध लेनदेन पर खाता फ्रीज कर अधिकारियों को भेज दिया था। जांच में सामने आया था कि आरोपी ने अपनी पत्नी के खाते को जुड़वा दिया था। इल्हाम को बीते दिनों निलंबित कर दिया गया था। 

इस मामले में सीडीओ की अगुवाई में गठित की गई कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी थी। जिसके बाद आगे सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही थी। डीएम के निर्देश पर डीआईओएस राजीव कुमार ने सदर कोतवाली में तहरीर दी। जिसके आधार पर इल्हाम उर्रहमान शम्सी और उसी पत्नी अर्शी खातून के खिलाफ जाली दस्तावेज बनाकर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, दस्तावेजों की जालसाजी आदि संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। इधर, डीएम ने आरोपी की संपत्ति की जांच के भी निर्देश दिए हैं।  कोतवाल सत्येंद्र कुमार ने बताया कि डीआईओएस से मिली तहरीर के आधार पर आरोपी दंपति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। विवेचना में साक्ष्य के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। 

गलत तरीके से बनाई गई थी बेनीफिशरी
कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर में डीआईओएस ने बताया कि आरोपी इल्हाम उर्रहमान की पत्नी अर्शी खातून का बचत खाता बैंक ऑफ बड़ौदा पीलीभीत शाखा में है। इसमें तीन दिसंबर 2025 को 21 एनईएफटी के माध्यम से 2427920 रुपये पत्नी के खाते में हस्तांतरित कर दियाग या। कुल 98 ट्रांजेक्शन से 1.01 करोड़ से अधिक धनराशि भेजी गई। बताते हैं कि इल्हाम डीआईओएस कार्यालय में वेतन, बिल, टोकन जनरेशन आदि का कार्य देख रहा था। आरोप है कि उसने  गलत तरीके से बेनीफिशरी बनाकर और तत्कालीन डीआईओएस को अंधकार में रखकर रुपये पत्नी के खाते में हस्तांतरित करा लिए थे। 

डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक सरकारी धनराशि के गबन के मामले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और  उसकी पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। संपत्ति की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। जनपद के समस्त आहरण वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह भुगतान संबंधी बिलों पर गहन परीक्षण के बाद ही हस्ताक्षर करें। अनियमितता मिलने पर आहरण वितरण अधिकारी के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी।

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