Moradabad: पौष्टिक आहार और शारीरिक गतिविधि में कमी कर रही बीमार

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में इन दिनों टाइप-4 डायबिटीज के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। प्रतिदिन 30 से अधिक मरीज इस समस्या के साथ उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में देखने को मिल रही है, जिसके पीछे असंतुलित जीवनशैली और बढ़ती उम्र प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

जनरल फिजिशियन डॉ. आशीष कुमार सिंह ने बताया कि टाइप-4 डायबिटीज को एज-रिलेटेड डायबिटीज भी कहा जाता है। यह ज्यादातर अधिक उम्र के लोगों में होती है, जिनका शारीरिक श्रम कम हो जाता है और शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता घटने लगती है। उन्होंने बताया कि कई बार मरीजों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि वे मधुमेह से ग्रसित हैं, क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं। 

उन्होंने कहा कि समय पर पहचान न होने पर यह बीमारी हृदय, किडनी और आंखों पर भी असर डाल सकती है। ओपीडी में बढ़ती भीड़ को देखते हुए मरीजों को नियमित जांच और परामर्श की सुविधा दी जा रही है। चिकित्सक बुजुर्गों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर शुगर जांच की सलाह दे रहे हैं। इसके बाद ही इलाज शुरू किया जा रहा है।

क्या है टाइप-4 डायबिटीज ?
टाइप-4 डायबिटीज उम्र बढ़ने के साथ विकसित होने वाली मधुमेह की अवस्था है, जिसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता। टाइप-4 डायबिटीज उन बुजुर्गों में अधिक पाई जाती है जिनकी शारीरिक गतिविधि कम हो गई हो, वजन अधिक हो या खानपान असंतुलित हो। कई बार यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए शुरुआती चरण में लक्षण स्पष्ट नहीं होते।
इंसेट

कैसे होती है यह बीमारी ?
- बढ़ती उम्र के कारण अग्न्याशय (पैंक्रियाज) की इंसुलिन बनाने की क्षमता प्रभावित होती है।
- शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पातीं (इंसुलिन रेजिस्टेंस)।

ये हैं लक्षण

- बार-बार पेशाब आना

- ज्यादा प्यास लगना

- थकान और कमजोरी

- धुंधला दिखाई देना

- घाव का देर से भरना


कैसे करें बचाव?
- रोजाना हल्का व्यायाम या सैर

- संतुलित और कम मीठा वाला आहार

- नियमित ब्लड शुगर जांच

- वजन नियंत्रित रखना

 

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