वाइल्ड लाइफ: साइगा मृग, अनोखे रूप वाला जीव

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Published By Anjali Singh
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साइगा मृग सामान्य मृग और चींटीखोर का अनोखा मिश्रण है। यह दुर्लभ प्रजाति मुख्यतः मध्य एशिया और दक्षिण–पूर्वी यूरोप के विस्तृत घास के मैदानों में पाई जाती है। साइगा मृग प्रायः 30 से 40 सदस्यों के झुंड में रहते हैं और तेज़ गति से लंबी दूरी तय करने के लिए जाने जाते हैं।

दुर्भाग्यवश, अनियंत्रित शिकार और अवैध व्यापार के कारण इनकी आबादी पिछले कई दशकों से लगातार घटती जा रही है। स्थानीय समुदायों द्वारा इनके मांस का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है, जबकि नर साइगा के सींगों का इस्तेमाल पारंपरिक चीनी औषधि में होने के कारण इनका शिकार और भी बढ़ गया है। यही कारण है कि आज साइगा मृग दुनिया के सबसे संकटग्रस्त स्तनधारियों में गिने जाते हैं।  

साइगा मृग के शरीर पर दालचीनी रंग के घने और मुलायम बाल होते हैं, जो मौसम के अनुसार बदलते रहते हैं। इसकी सबसे विशिष्ट पहचान इसकी बड़ी, लचीली और नीचे की ओर झुकी हुई नाक है, जो पूरे चेहरे को ढकती हुई प्रतीत होती है। यह नाक केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि एक अत्यंत उपयोगी जैविक संरचना है। गर्मियों में यह हवा में उड़ने वाली धूल और रेत को फेफड़ों में जाने से रोकती है, जबकि कठोर सर्दियों में अत्यधिक ठंडी हवा को फेफड़ों तक पहुँचने से पहले गर्म कर देती है।

शिकार का सबसे गहरा असर इनके लैंगिक अनुपात पर पड़ा है। चूँकि केवल नर साइगा मृग के ही सींग होते हैं, इसलिए शिकारी मुख्य रूप से नर को ही निशाना बनाते हैं। परिणामस्वरूप, कई क्षेत्रों में मादा साइगा की संख्या असामान्य रूप से अधिक हो गई है, जिससे प्रजनन चक्र और पूरी आबादी का संतुलन बिगड़ रहा है।

साइगा मृग न केवल जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इनका संरक्षण वास्तव में पूरे स्टेपी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जुड़ा हुआ है।