Bareilly : निर्माण कार्यों की धीमी चाल से मुश्किलों में डगर, खतरे में सफर
बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट बनाने के वादे के साथ शहर में शुरू हुई सीएम ग्रिड योजना अव्यवस्था, लापरवाही और खतरे की पहचान बनती जा रही है। स्टेडियम रोड पर धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य ने जहां वाहन चालकों के धैर्य की परीक्षा ली है, वहीं एमबी इंटर कॉलेज रोड का हाल और भी बेहाल है। निर्माण कार्यों की धीमी चाल से लोगों की दिक्कतें बढ़ रही हैं।
सीएम ग्रिड के दूसरे चरण में कोहाड़ापीर पेट्रोल पंप से जीआरएम, कुदेशिया रोड होते हुए सूद धर्म कांटे तक सड़क खोदाई और पाइप लाइन बिछाने का काम इतने बेतरतीब तरीके से चल रहा है कि वाहन चालकों के सामने हर वक्त खतरा मंडरा रहा है। यह आलम तब है कि जब शासन ने इस काम के लिए 35 करोड़ का बजट जारी किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यदायी संस्था ने काम की गुणवत्ता और सुरक्षा की परवाह किए बिना सड़क पर मलबे और मिट्टी के ढेर छोड़ दिए हैं। सड़क इतनी संकरी हो गई है कि दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए यह रोजमर्रा की जद्दोजहद बन गई है।
आवाजाही में परेशानी हो रही है। दिन में कई बार जाम लग जाता है और रात के समय हालात और बदतर हो जाते हैं। सड़क किनारे फैले पाइप और खुले छोड़ दिए गए गड्ढे न केवल सड़क को असुरक्षित बनाते हैं, बल्कि किसी बड़े हादसे का निमंत्रण भी हैं। कार्यदायी संस्था को नगर आयुक्त कई बार चेतावनी दे चुके हैं, बावजूद काम में तेजी नहीं आई। नगर निगम के मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी ने बताया कि सीएम ग्रिड योजना में होने वाले कामों की मॉनिटरिंग कराई जा रही है। कार्य गति में सुधार नहीं हुआ तो कार्रवाई की जाएगी।
धूल और गड्ढों में फंसी मरीजों की जिंदगी
कोहाड़ापीर से एमबी इंटर कालेज रोड और स्टेडियम रोड शहर के व्यस्त इलाकों में है, इस रोड पर कई अस्पताल हैं, लेकिन जिम्मेदारों की बेरुखी ने इस सड़क को अव्यवस्था का अड्डा बना दिया। रोजाना मरीज और उनके तीमारदारों को धीमे और बेतरतीब निर्माण कार्य से परेशानी उठानी पड़ती है। धूल, गड्ढे और मलबे के कारण एंबुलेंस और निजी वाहन रेंगते नजर आते हैं। सड़क किनारे स्थित प्रतिष्ठानों के संचालक भी उड़ती धूल से त्रस्त हैं।
कोहाड़ापीर की सुमन वर्मा ने बताया कि सीएम ग्रिड योजना का नाम लेकर सड़क महीनों से खोद रखी है। न काम की रफ्तार है, न कोई जवाबदेही। अगर यही स्मार्ट सिटी है, तो आम आदमी की मुश्किलें कौन देखेगा।
राजेंद्र नगर की राधिका ने बताया कि रोज गड्ढों और मिट्टी से भरी सड़क पर जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है। रात में हालात और खतरनाक हो जाते हैं, इसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
राहगीर गोपाल ने बताया कि स्टेडियम रोड और एमबी इंटर कालेज रोड का हाल बेहाल है। अक्सर यहां से निकलना होता है। स्मार्ट सिटी के नाम करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन हालात बदतर होते जा रहे हैं। दुकानदार अनिमेश के मुताबिक विकास के नाम पर शहर में कई जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। कई प्रमुख मार्गों का बुरा हाल है। काम की धीमी रफ्तार हर किसी के लिए मुसीबत बनी हुई है।
