ट्रंप टैरिफ से पुराने ऑर्डर पर असर, वैश्विक कारोबार की स्थिति साफ होने पर तक भ्रम की स्थिति में निर्यातक
कानपुर, अमृत विचार। अमेरिका पर टैरिफ पर वहां के कोर्ट का निर्णय और ट्रंप की नई घोषणा के बीच यह मुद्दा फिर विवाद में है। नए विवाद के पनपने के बाद निर्यातक भ्रम में हैं। ऐसे में रिकवर हो रहे पुराने ऑर्डर पर दोबारा असर पड़ रहा है। विदेशी खरीदार और निर्यातक के बीच पैदा हुए भ्रम से माना जा रहा है कि कुछ दिन ऑर्डर और होल्ड हो सकते हैं। निर्यात विशेषज्ञ इस प्रकरण के बाद सप्ताह भर में स्थिति साफ होने की बात कर रहे हैं।
शहर से अमेरिका को लगभग 25 सौ करोड़ रुपये का निर्यात होता है। 50 फीसदी टैरिफ के बाद यह कारोबार घटकर लगभग 30 से 40 फीसदी तक पहुंच गया था। इसके बाद ट्रेड डील होने से पुराने रुके हुए ऑर्डर दोबारा रिकवर हो रहे थे। माना जा रहा है कि 20 फीसदी ऑर्डर पर खरीदार और निर्यातकों के बीच सहमति भी बन गई थी। इस पर नए विवाद के उठने के बाद अब दोबारा पुराने ऑर्डर पर बातचीत मध्यम हो गई है। विदेशी खरीदार और निर्यातक दोनो ही वैश्विक बाजार की स्थिति साफ होने के बाद अब हल निकालने की बात कर रहे हैं।
फिलहाल कारोबार रुका हुआ है। माना जा रहा है कि मार्च के पहले सप्ताह से पुराने ऑर्डर पर दोबारा बातचीत शुरू हो सकेगी। निर्यात कारोबार पर नई स्थिति पनपने पर फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑग्रनाईजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि टैरिफ पर नई वैश्विक स्थिति बनने पर ऐसे निर्यातक सबसे अधिक परेशान है जो आयात और निर्यात दोनो से ही जुड़े हुए हैं। उन्हें वैश्विक टैरिफ के आधार पर अब आगे बात करनी होगी। नए हालातों पर फिलहाल निर्यातकों के सामने स्थिति साफ नहीं हैं। ऐसे में एक या दो सप्ताह उन्हें इंतजार करना होगा।
प्रोडक्शन पर असर नहीं
अमेरिका में टैरिफ पर कोर्ट से आए निर्णय और उस पर ट्रंप के फैसले के बाद उपजी स्थिति में फिलहाल शहर की एक्सपोर्ट युनिट में प्रोडक्शन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। निर्यातकों का कहना है कि फिलहाल मौजूदा स्थिति में ऑर्डर पर कोई सूचना खरीदारों की ओर से नहीं आई है। हालिया स्थिति से अब यदि वैश्विक बाजार में टैरिफ में भविष्य में कोई बड़ा उलट फेर होता है तो प्रोडक्शन पर असर से नकारा नहीं जा सकता।
निर्यातक देख रहे संभावनाएं
मौजूदा स्थितियों में शहर के निर्यातक वैश्वक टैरिफ के अंतिम आदेश तक इंतजार की स्थिति में बने हुए हैं। उनका मानना है कि यदि कुछ देशों में नए टैरिफ से बड़ा हेरफेर होता है तो उसका लाभ कम टैरिफ वाले देशों को हो सकता है। इस स्थिति में भारत और शहर के पारंपरिक निर्यातकों को लाभ संभव हो सकता है।
25 सौ करोड़ रुपये का अमेरिका को निर्यात
10 हजार करोड़ रुपये का शहर का कुल निर्यात
42 सौ युनिट शहर की निर्यात कारोबार से जुड़ी
45 फीसदी एमएसएमई सेक्टर निर्यात से जुड़ा
