Bareilly: रुहेलखंड की जलवायु और मिट्टी में उगेगा एवोकाडो, किसाानों को मिलेगा मार्गदर्शन

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। रुहेलखंड क्षेत्र में पहली बार हाई-टेक एवोकाडो उद्यान की स्थापना कर एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बागवानी अनुसंधान और वैकल्पिक फसल प्रणाली के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फैकल्टी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी की ओर से विश्वविद्यालय परिसर के गेट नंबर 2 के समीप एवोकाडो उद्यान विकसित कर क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह परियोजना को वीसी प्रो. केपी सिंह के मार्गदर्शन में विकसित किया जा रहा।

कृषि एवं प्रोद्यौगिक संकाय के डीन डॉ. उपेंद्र वालियान के नेतृत्व में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों द्वारा एवोकाडो का मॉडल उद्यान स्थापित की जा रहा। उद्यान में विश्व प्रसिद्ध पिंकर्टन, हैस, लैम्ब हैस और रीड की उन्नत किस्में रोपित की जा रही हैं। ये किस्में उच्च उत्पादन क्षमता, बेहतर गुणवत्ता, क्रीमी गूदे और लंबी शेल्फ लाइफ के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय हैं। उन्होंने बताया कि अब तक एवोकाडो को केवल पहाड़ी या दक्षिणी राज्यों की फसल माना जाता रहा है, लेकिन इस पहल के माध्यम से रुहेलखंड की जलवायु और मिट्टी में इसकी अनुकूलता का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। 

विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ इन किस्मों की वृद्धि दर, फलन, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर नियमित अनुसंधान करेंगे, जिससे स्थानीय किसानों को प्रामाणिक आंकड़ों के आधार पर एवोकाडो की खेती करने का मार्गदर्शन मिल सकेंगा। इसके लिए उद्यान में आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली लागू की गई है। जिससे पौधों को नियंत्रित मात्रा में पानी और पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा सकें। इससे 40-60 प्रतिशत तक जल की बचत के साथ पौधों की संतुलित वृद्धि सुनिश्चित होती है।

 रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि एवोकाडो एक उच्च मूल्य वाली फल फसल है, जिसकी मांग महानगरों और निर्यात बाजार में लगातार बढ़ रही है। यदि क्षेत्रीय स्तर पर इसकी सफल खेती सिद्ध होती है, तो यह पारंपरिक फसलों के विकल्प के रूप में किसानों की आय दोगुनी करने में सहायक हो सकती है।

डीन कृषि एवं प्रोद्यौगिक संकाय डॉ. उपेंद्र वालियान के मुताबिक उद्यान भविष्य में शोध, प्रायोगिक अध्ययन और किसान प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां किसानों को पौध चयन, रोपण तकनीक, पोषण प्रबंधन और विपणन रणनीति का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

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