Bareilly: विषैले पारे को कम विषैले रूप में बदल देगा बैक्टीरिया
रतन सिंह, बरेली। पर्यावरण प्रदूषण कम करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज अरोरा और उनके शोध छात्र ने एक ऐसे विशेष बैक्टीरिया की पहचान की है जो अत्यंत विषैले भारी धातु मरकरी (पारा) को कम विषैले रूप में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। इसमें बैक्टीरिया स्यूडोमोनास एरुजिनोसा की विशेष गतिविधि का पता चला है। इसकी मदद से औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन और पानी में होने वाले पारे के प्रदूषण को दूर करने में मदद मिलेगी।
प्रो. डॉ. पंकज अरोरा ने बताया कि यह बैक्टीरिया मरकरी आयन की दिशा में सक्रिय रूप से गति करता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में कीमोटॉक्सिस कहा जाता है। बैक्टीरिया अपनी विशेष जैव-रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मरकरी को कम विषैले एलिमेंटल मरकरी में बदल देता है। यह परिवर्तित मरकरी गैसीय रूप में वाष्पीकृत होकर वातावरण में फैल जाती है, जिससे मिट्टी और जल में मौजूद पारे की विषाक्तता कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया की मेर ऑपेरॉन प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी प्रणाली के जरिये एन्जाइमेटिक प्रतिक्रिया होती है, जो मरकरी आयन को एलिमेंटल मरकरी में परिवर्तित करती है। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में बैक्टीरिया की यह क्षमता सफलतापूर्वक प्रमाणित की गई है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तकनीक के आधार पर ऐसे जैविक समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जो पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर मरकरी के दुष्प्रभाव को भी कम कर सकें। वैज्ञानिक समुदाय इस उपलब्धि को पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहा है। बता दें कि डॉ. पंकज अरोरा लगातार 2020 से दुनिया-भर के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हैं, जो इस शोध की विश्वसनीयता को और भी मजबूत आधार प्रदान करता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह खोज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मरकरी एक अत्यंत खतरनाक भारी धातु है, जो औद्योगिक अपशिष्ट, खनन गतिविधियों और रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण जल और मिट्टी में जमा हो जाती है। इसके कारण यह खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन जाती है।
तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है मरकरी प्रदूषण
मरकरी या पारा एक अत्यंत विषैला भारी धातु तत्व है। यह औद्योगिक अपशिष्ट, कोयला आधारित उद्योग, खनन और रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण जल और मिट्टी में पहुंचता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से तंत्रिका तंत्र, किडनी और मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
पर्यावरण के अनुकूल है बायोरिमेडिएशन तकनीक
बायोरिमेडिएशन ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें सूक्ष्मजीवों, बैक्टीरिया या फफूंद की मदद से प्रदूषित मिट्टी, पानी और पर्यावरण को साफ किया जाता है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है तथा औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण में तेजी से उपयोग में लाई जा रही है।
रुविवि पादप विज्ञान विभाग डॉ. पंकज अरोड़ा ने बताया कि मरकरी से प्रभावित क्षेत्रों में जैव-उपचार (बायोरिमेडिएशन) तकनीक के विकास में यह शोध सहायक हो सकता है। यदि इस बैक्टीरिया का बड़े स्तर पर उपयोग किया जाए तो औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण सुधार संभव है।
