संपादकीय: क्रिकेट शिखर पर तिरंगा
भारतीय क्रिकेट ने वह कर दिखाया, जो अब तक इस क्षेत्र में असंभव माना जाता था। 2024 में बारबाडोस की जीत के बाद, 2026 में खिताब को सफलतापूर्वक डिफेंड करना न केवल भारतीय टीम के कौशल को दर्शाता है, बल्कि यह विश्व क्रिकेट में भारत के पूर्ण वर्चस्व की घोषणा भी है। 2007, 2024 और 2026 के तीन टी-20 वर्ल्ड कप खिताब जीतने वाला पहला देश बनकर टीम इंडिया ने विश्व क्रिकेट के शिखर पर अपना तिरंगा गहराई तक गाड़ दिया है। विश्व विजेता बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बधाई मात्र शिष्टाचार नहीं, उस ‘स्पोर्टिंग कल्चर’ की स्वीकारोक्ति और सराहना है, जिसे देश ने हाल के वर्षों में आत्मसात किया है।
भारत का यह वर्चस्व रातों-रात नहीं आया है। इसके पीछे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की कुशल प्रबंधन रणनीति और सरकार का खेल-अनुकूल दृष्टिकोण रहा है। आज भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट ढांचा है। बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी, 40 एकड़ में फैली ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ जो दुनिया का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट प्रशिक्षण केंद्र है, जिसमें 45 पिचें, इनडोर सुविधाएं और रिकवरी सिस्टम हैं। इसके अलावा छोटे शहरों तक फैले अत्याधुनिक स्टेडियमों, स्तरीय कोचिंग केंद्रों ने भी प्रतिभाओं को निखारने का काम किया है।
आईपीएल ने भारतीय खिलाड़ियों को दबाव सोखने और अंतर्राष्ट्रीय दिग्गजों के साथ खेलने का जो अनुभव प्रदान किया, उसी का परिणाम है कि आज भारत के पास एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग ‘ए’ श्रेणी की टीमें तैयार हैं। इन्ही सब के चलते 19 बरस से कम क्रिकेटरों के भी विश्वविजेता हम ही हैं तथा महिला क्रिकेट भी बेहद तेजी से प्रगति कर रहा है। उसके पास भी विश्व खिताब है। आज आक्रामक क्रिकेट और डाटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल ने भारत को आधुनिक क्रिकेट का अगुआ बना दिया है।
यह नया खिताब इस बात की तस्दीक करता है कि भारतीय टीम अब केवल प्रतिभा पर नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था पर टिकी है, जो चैंपियंस पैदा करना जानती है। भारत अब क्रिकेट का सबसे बड़ा बाजार ही नहीं, वह विश्व क्रिकेट का ‘पॉवर हाउस’ है। भारत के दमदार और आकर्षित करने वाले प्रदर्शनों ने एशियाई उपमहाद्वीप में ही नहीं संसार भर में इस खेल के प्रति लोगों का आकर्षण और लोकप्रियता को बढ़ाया है। भारत की सफलता ने ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों पर क्रिकेट को शामिल करने की राह को और अधिक पुख्ता किया है, जिससे 2028 के ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी पक्की हुई। यह कहना उचित ही है कि भारतीय क्रिकेट वित्तीय शक्ति और मैदानी वर्चस्व का दुर्लभ संगम है।
यह जीत छोटे शहरों के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और इससे निचले स्तर पर भी इस खेल में निवेश तेजी से बढ़ेगा। निःसंदेह इससे भारतीय क्रिकेट की आर्थिक स्थिति और मज़बूत होगी। उसकी ब्रांड वैल्यू भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर ‘विजेता मानसिकता’ की स्थापना करने वाली यह जीत आने वाले कई दशकों तक क्रिकेट और अन्य भारतीय खेलों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी, इसके मार्गदर्शन में ऐसी विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल होती रहेंगी।
