यूपी कैबिनेट के 30 फैसले मंजूर: 'मुख्यमंत्री परिवहन योजना 2026' को हरी झंडी, पढ़िए योगी कैबिनेट के फैसले
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई, जबकि तीन प्रस्तावों को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना और मंत्री रविन्द्र जायसवाल और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने दी।
चल-अचल संपत्ति की वार्षिक घोषणा अनिवार्य
कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्रियों ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति की वार्षिक घोषणा अनिवार्य कर दी है। अब सभी कर्मचारियों को हर वर्ष अपनी संपत्ति का विवरण देना होगा। इसके साथ ही यदि कोई कर्मचारी अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक राशि शेयर या स्टॉक मार्केट में निवेश करता है, तो उसे इसकी जानकारी देनी होगी। ऐसे मामलों में जांच अनिवार्य होगी और दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि सरकार ने खतौनी से संबंधित एक अहम निर्णय लिया है। इसके तहत अब जमीन बेचने वाले व्यक्ति के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह जमीन का वास्तविक मालिक है या नहीं। इसके लिए उसकी मिल्कियत का प्रमाणपत्र भी लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में सर्किल रेट पर एक प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता की पहचान और मिल्कियत की पूरी जांच खतौनी के आधार पर की जाएगी। बिना खतौनी सत्यापन के रजिस्ट्री नहीं होगी। विक्रेता के लिए अपनी मिल्कियत खतौनी में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। साथ ही स्टाम्प शुल्क सर्किल रेट के आधार पर ही लिया जाएगा और नगर निगम क्षेत्रों में 2 प्रतिशत अतिरिक्त विकास शुल्क भी लगाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना 2026 को भी मंजूरी
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना 2026 को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण इलाकों में परिवहन सुविधा मजबूत करने के लिए 28 सीटों वाली छोटी बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा ओला-उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं।
बसों को रखा जाएगा टैक्स फ्री
परिवहन से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि 'मुख्यमंत्री परिवहन योजना 2026' को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश की हर ग्राम सभा तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत चलने वाली बसों को टैक्स फ्री रखा जाएगा और प्राइवेट ऑपरेटरों को बस संचालन की अनुमति दी जाएगी।
चलाई जाएंगी 28 सीटों वाली बसें
योजना के तहत अधिकतम 28 सीटों वाली बसें चलाई जाएंगी, जो जिला मुख्यालय से होकर संबंधित ग्राम सभाओं तक जाएंगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बसें शाम तक वापस उसी गांव तक पहुंच जाएं, जहां से उनका संचालन शुरू हुआ था। मंत्री ने बताया कि यदि किसी एक ही रूट पर कई आवेदक बस संचालन के लिए दावा करते हैं तो उस स्थिति में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से ई-ऑक्शन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इसके अलावा कांशी राम योजना के खाली या अवैध कब्जे वाले मकानों से कब्जेदारों को हटाकर उनकी मरम्मत और रंगाई-पुताई कराई जाएगी तथा उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पात्र परिवारों को आवंटित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से प्रशासनिक पारदर्शिता, ग्रामीण कनेक्टिविटी और आवास सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
