पौराणिक कथा: निष्काम प्रेम व अटूट निष्ठा की शक्ति

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

एक बार वृंदावन में ऐसा समय आया जब नंदलाल अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उनकी बीमारी देखकर पूरे ब्रज में चिंता का वातावरण फैल गया। अनेक प्रकार की दवाएं और जड़ी-बूटियां आजमाई गईं, लेकिन किसी भी उपाय से कृष्ण की तबीयत में सुधार नहीं हो रहा था। सभी लोग असहाय होकर किसी चमत्कार की प्रतीक्षा कर रहे थे। तभी श्रीकृष्ण ने स्वयं एक अनोखा उपाय बताया। उन्होंने गोपियों से कहा कि यदि कोई ऐसा व्यक्ति, जो उनसे अत्यंत प्रेम करता हो और उनकी सच्ची चिंता करता हो, अपने पैरों को धोकर उस जल को उन्हें पिला दे, तो वे अवश्य स्वस्थ हो जाएंगे। 

यह सुनते ही वहां उपस्थित सभी गोपियां गहरी दुविधा में पड़ गईं। वे सभी कृष्ण से अपार प्रेम करती थीं और उनकी भक्ति में पूरी तरह समर्पित थीं, लेकिन इस उपाय को अपनाने का साहस कोई नहीं जुटा पा रही थी। गोपियों के मन में एक भय था कि यदि किसी ने अपने पैरों का जल कृष्ण को पिला दिया और किसी कारणवश वे स्वस्थ न हुए, तो यह बहुत बड़ा अपराध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में नर्क का दंड भी भोगना पड़ सकता था। वे कृष्ण के लिए चिंतित तो थीं, लेकिन संभावित परिणामों के विचार से उनके कदम ठिठक रहे थे। इसी बीच वहां राधा पहुंचीं। 

जैसे ही उन्होंने अपने प्रिय कृष्ण को उस अवस्था में देखा, उनका हृदय व्याकुल हो उठा। गोपियों ने उन्हें कृष्ण द्वारा बताया गया उपाय समझाया। राधा ने बिना एक पल गंवाए अपने पैरों को धोकर उसी जल से चरणामृत तैयार किया और उसे कृष्ण को पिलाने के लिए आगे बढ़ गईं। राधा को यह भली-भांति ज्ञात था कि वह क्या कर रही हैं। उनके मन में भी वही भय था, जो अन्य गोपियों के मन में था, लेकिन उनके लिए कृष्ण का जीवन और स्वास्थ्य सबसे अधिक महत्वपूर्ण था। 

यदि उनके इस कार्य के कारण उन्हें नर्क भी जाना पड़े, तो भी वे इसके लिए तैयार थीं। उनके प्रेम और समर्पण के सामने अपने भविष्य की चिंता नगण्य थी। जैसे ही कृष्ण ने वह चरणामृत ग्रहण किया, उनकी अवस्था तुरंत सुधरने लगी और थोड़ी ही देर में वे पूर्णतः स्वस्थ हो गए। यह राधा के निष्काम प्रेम और अटूट निष्ठा की शक्ति थी, जिसने इस चमत्कार को संभव बना दिया। इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा प्रेम वही है, जिसमें प्रियजन की भलाई के लिए स्वयं के सुख-दुख की चिंता भी त्याग दी जाए।