UP : समाज कल्याण विभाग में ‘घोटाला सिंडिकेट’ से लड़ना आसान नहीं
सालों पुराने फर्जीवाड़े पर कार्रवाई में हुई देर, नेता-लिपिक और दलालों का भंडाफोड़ मुश्किल
धीरेंद्र सिंह, लखनऊ, अमृत विचार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सालों पुराने समाज कल्याण विभाग के ‘घोटाला सिंडिकेट’ कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है। पांच माह में छह समाज कल्याण अधिकारियों की बर्खास्तगी के बाद अभी दर्जनों कतार में हैं। हालांकि तत्कालीन मंत्री-शासन-प्रशासन से लेकर रातोंरात करोड़पति बनने वाले लिपिकों और दलालों को अंजाम तक पहुंचाना सपने जैसा है।
समाज कल्याण विभाग की कई योजनाओं में लंबे समय से फर्जीवाड़े के आरोप सामने आते रहे हैं। जांच में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, वृद्धावस्था पेंशन और आर्थिक सहायता योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। कई मामलों में करोड़ों रुपये की वसूली और सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में कटौती तक के आदेश दिए गए हैं। ताजा कार्रवाई में अमेठी के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मनोज कुमार शुक्ला और हरदोई के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार को सेवा से बर्खास्त किया गया है।
अमेठी में विभाग के ही प्रधान लिपिक गोकुल प्रसाद जायसवाल ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने उन्हें चैंबर में बुलाकर धमकाया और मोबाइल छीनकर फोन पे के जरिए उनकी पत्नी के खाते में 40 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए। विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए। हरदोई में तत्कालीन अधिकारी हर्ष मवार पर भुगतान और खरीद में टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर वित्तीय नियमों के विपरीत काम कराने के आरोप सिद्ध हुए। जांच में पाया गया कि कोटेशन के आधार पर भुगतान कर सरकारी धन के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं की गईं।
इससे पहले श्रावस्ती की तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव को भी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। उन पर मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना और छात्रवृत्ति योजनाओं में लाभार्थियों के खातों में हेरफेर कर सरकारी धन का गबन कराने के आरोप सिद्ध हुए। मथुरा के तत्कालीन अधिकारी करुणेश त्रिपाठी के मामले में जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 11 मान्यता विहीन संस्थानों को 2.53 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी कर दी गई और फर्जी छात्रों के नाम पर भुगतान हुआ। यहां तक कि 2 साल से 51 साल तक की उम्र के लोगों को आईटीआई छात्र दिखाया गया। हापुड़ के संजय कुमार ब्यास और शाहजहांपुर के राजेश कुमार के खिलाफ भी करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के बाद बर्खास्तगी और वसूली की कार्रवाई हो चुकी है। वहीं औरैया के श्रीभगवान, मथुरा के विनोद शंकर तिवारी और उमा शंकर शर्मा जैसे सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में स्थायी कटौती के आदेश दिए गए हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार विभाग में घोटालों का नेटवर्क सिर्फ जिलों तक सीमित नहीं था। योजनाओं के नाम पर फर्जी लाभार्थी जोड़ना, रिकॉर्ड में हेरफेर और मान्यता विहीन संस्थानों को भुगतान कर करोड़ों रुपये का खेल चलता रहा। अब जांच की आंच कई अन्य अधिकारियों, लिपिकों और कथित दलालों तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचेगी – असीम अरुण
समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण का कहना है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं जो वर्षों से दबे पड़े थे। अब सभी मामलों में जांच कर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
कैसे चलता था घोटाले का खेल
• योजनाओं में फर्जी लाभार्थी जोड़कर भुगतान
• छात्रवृत्ति के नाम पर मान्यता विहीन संस्थानों को धनराशि
• रिकॉर्ड में हेरफेर कर खातों में बदलाव
• टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर भुगतान
• कर्मचारियों पर दबाव और वसूली के आरोप
अब तक की बड़ी कार्रवाई
• पांच माह में 6 जिला समाज कल्याण अधिकारी बर्खास्त
• कई मामलों में करोड़ों रुपये की वसूली के आदेश
• 3 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में स्थायी कटौती
• कई अन्य अधिकारी-कर्मचारी अभी जांच के दायरे में
