फारूक अब्दुल्ला पर फायरिंग को लेकर भाजपा-कांग्रेस में नोक झोक, खरगे ने जम्मू -कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठाये सवाल

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। जम्मू -कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात जानलेवा हमले के मुद्दे पर गुरुवार को राज्यसभा में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के बीच तीखी नोक झोंक हुई और सरकार की ओर से सदन को आश्वस्त किया गया कि इस घटना की व्यापक जांच कराई जाएगी तथा उनकी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शून्य काल शुरू होने से पहले यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि जम्मू -कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था खत्म हो गई है और वहां लोगों के लिए खतरे का माहौल है। 

उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था अब केंद्र तथा सीधे गृह मंत्रालय के हाथ में है लेकिन वहां प्रमुख लोगों की जान को खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हमले के लिए सीधे-सीधे केंद्र सरकार जिम्मेदार है। खरगे ने सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को जम्मू -कश्मीर के राज्य के दर्जे से जोड़ते हुए कहा कि जब तक वहां राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाएगा कश्मीर सुरक्षित नहीं होगा।

उनकी बातों का भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी नोक झोंक हुई। सदन के नेता और वरिष्ठ मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि डॉ अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला चिंता का गंभीर विषय है और सरकार इसे पूरी गंभीरता से ले रही है। उन्होंने सरकार की ओर से सदन को आश्वस्त किया कि इस घटना की व्यापक जांच की जाएगी और दोषी से पूछताछ में उसके मंसूबों की जानकारी ली जाएगी। 

उन्होंने कहा कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी और डॉ अब्दुल्ला की सुरक्षा को भी मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को राजनीतिक चश्मे से देखना उचित नहीं है और राज्य के दर्जे को इस घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के नेता के डॉ अब्दुल्ला को लेकर सरकार पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के आरोप कांग्रेस पार्टी की सोच का नतीजा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मंसूबे ऐसे ही रहे हैं। 

जम्मू -कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के नेता चौधरी मोहम्मद रमजान ने डॉ अब्दुल्ला पर हमले की घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि हैरानी की बात यह है कि उस समय पुलिस कहीं आसपास नहीं थी । उन्होंने कहा कि डॉ अब्दुल्ला के साथ मौजूद उपमुख्यमंत्री भी इस हमले में घायल हुए हैं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने दोषी को काबू में किया और डॉ अब्दुल्ला को अस्पताल लेकर गए । उन्होंने श्री अब्दुल्ला की सुरक्षा बढ़ाए जाने तथा जम्मू -कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की।

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