पैर गंवाने के बाद भी सपनों को नहीं छोड़ा... लखनऊ के मोनू चौरसिया अब श्रीलंका में भरेंगे पैरा क्रिकेट की उड़ान
नीरज मिश्र अभिषेक, लखनऊ, अमृत विचार: शहर के डालीगंज निवासी 30 वर्षीय मोनू चौरसिया संघर्ष और हौसले की मिसाल बनकर उभरे हैं। बचपन में हुए एक हादसे में अपना दाहिना पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अब पैरा इंडियन क्रिकेट टी-20 टीम में चयनित होकर श्रीलंका में होने वाली पैरा टी-20 प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। मोनू चौरसिया सात वर्ष की उम्र में ट्रैक्टर की चपेट में आने पर अपना पैर गंवा बैठे थे। इस हादसे के बाद उनकी जिंदगी में अंधेरा छा गया था लेकिन परिवार के हौसले और केजीएमयू के लिंब सेंटर की मदद से उन्हें नई उम्मीद मिली।
आर्टिफिशियल पैर लगने के बाद उन्होंने न सिर्फ सामान्य जीवन जीना शुरू किया बल्कि खेल के मैदान में भी अपनी पहचान बनाई। कई वर्षों की कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद उनका चयन पैरा इंडियन क्रिकेट टी-20 टीम में हुआ है। अब वह श्रीलंका में होने वाले पैरा टी-20 मुकाबलों में दमदार प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। मोनू को 2013 में उत्तर प्रदेश खेल विभाग की ओर से सम्मानित किया गया था, जबकि 2014 में उन्हें राज्य स्तरीय सम्मान के तहत सम्मानित किए जाने के साथ वर्ष 2015 में बिहार के खेल मंत्री ने भी उनके जज्बे को सलाम कर सम्मानित किया।
मोनू के इस सफर में उनके पिता हरीराम, मां गीता चौरसिया, भाई सोनू और बहनें राधा और रूपा लगातार उनका हौसला बढ़ाते रहे हैं। मोनू के लिए वॉलीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिंह प्रेरणा स्रोत हैं, जो स्वयं दिव्यांग होते हुए भी खेलों में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। फिलहाल मोनू जयपुर स्थित प्रिंटर क्लब ऑफ इंडिया कंपनी में काम कर रहे हैं।
खुद ही उठाना पड़ता है खर्च
मोनू बताते हैं कि प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए खिलाड़ियों को अक्सर अपना खर्च खुद ही उठाना पड़ता है। श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता के लिए उन्हें 55 हजार रुपये से अधिक खर्च करना पड़ा। उनका मानना है कि आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों की मदद और उन्हें सरकारी नौकरी देने के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए।
लिंब सेंटर ने दी नई उम्मीद
मोनू ने बताया कि पैर गंवाने के बाद जीवन में कोई उमंग नहीं रह गई थी। आगे पूरी जिंदगी पड़ी थी, ऐसे में परिवारीजनों को उम्मीद की किरण नजर आई जब वह केजीएमयू के लिंब सेंटर पहुंचे। जहां मामूली खर्च पर मोनू को आर्टिफिशल अंग लगाने के बाद वह अब सामान्य लोगों की तरह चल फिर सकते हैं, इतना ही नहीं अब वह ओलिंपिक में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
