24 घंटे में हटाएं सोशल मीडिया पोस्ट... Epstein मामले में मंत्री हरदीप पुरी की बेटी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी को दोषी अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का मंगलवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने उपयोगकर्ताओं को सोशल मीडिया मंचों पर किसी भी तरह से ऐसी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से भी रोका। हिमायनी पुरी द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई कर रहीं न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि सोशल मीडिया उपयोगकर्ता पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो मंच ऐसी सामग्री को हटा देंगे या उस (सामग्री) तक पहुंच को अवरुद्ध कर देंगे।
अदालत ने कहा कि हिमायनी पुरी के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता है और यदि अंतरिम राहत नहीं दी गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। उच्च न्यायालय ने कहा, ''परिणामस्वरूप, अगली सुनवाई की तारीख तक निम्नलिखित निर्देश जारी किए जाते हैं।'' अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई अगस्त में तय की। वादी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि वित्त पेशेवर के रूप में उनकी मुवक्किल की ''वैश्विक प्रतिष्ठा'' है जिसकी रक्षा करने की जरूरत है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप ''पूरी तरह से झूठे, बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण हैं।''
उन्होंने कहा कि मानहानिकारक सामग्री उन उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रकाशित और साझा की गई थी जो स्वयं को ''पत्रकार'' या 'कंटेंट क्रिएटर' बताते हैं। जेठमलानी ने अदालत को यह भी बताया कि वादी न्यूयॉर्क की निवासी हैं और उन्होंने अदालत से वैश्विक स्तर पर मानहानिकारक सामग्री को अवरुद्ध करने का आदेश पारित करने का आग्रह किया। मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने दलील दी कि इस तरह के आदेश किसी भी देश में पारित नहीं किए गए हैं और आपत्तिजनक सामग्री को देश-विशेष के आधार पर ही ब्लॉक किया जाता है।
उन्होंने अदालत को बताया कि वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया सामग्री को हटाने का मुद्दा उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष लंबित है। फिलहाल सोशल मीडिया सामग्री हटाने के आदेश को भारत तक सीमित रखते हुए अदालत ने उपयोगकर्ताओं और सोशल मीडिया मंचों को समन जारी किए और उन्हें मुख्य मामले के साथ-साथ अंतरिम राहत से जुड़ी अर्जी पर भी अपना जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत के बाहर अपलोड की गई सामग्री को सोशल मीडिया मंच भारत में ब्लॉक करेंगे। प्रतिवादियों में से एक के वकील ने दलील दी कि उसका वीडियो ''पत्रकारीय स्वतंत्रता'' के तहत बनाया गया है और स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा की जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि मामले पर विचार की आवश्यकता है और प्रतिवादियों को अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। हिमायनी पुरी ने अपने मुकदमे में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है और कई संस्थाओं को मानहानिकारक सामग्री फैलाने से रोकने का आदेश देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें एप्स्टीन और उसके अपराधों से जोड़ने के लिए एक ''समन्वित और दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान'' चलाया गया। उन्होंने आरोपियों से बिना शर्त माफी मांगने और अपने पोस्ट वापस लेने की भी मांग की।
याचिका में कहा गया है, ''22 फरवरी 2026 के आसपास से सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल मंचों, जिनमें 'एक्स', यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, लिंक्डइन, डिजिटल समाचार पोर्टल और अन्य वेब आधारित प्रकाशन शामिल हैं, पर झूठे, भ्रामक और मानहानिकारक पोस्ट, लेख, वीडियो और सामग्री प्रकाशित और प्रसारित की गई।'' हिमायनी पुरी ने दावा किया कि वह एक सफल वित्त और निवेश पेशेवर हैं और उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री की बेटी हैं।
उनके मुकदमे के अनुसार, प्रतिवादियों ने यह ''निराधार आरोप'' फैलाए कि हिमायनी पुरी के जेफ्री एप्स्टीन के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यावसायिक, वित्तीय या व्यक्तिगत संबंध थे। याचिका में कहा गया कि ये सभी आरोप पूरी तरह झूठे, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यहीन हैं। एप्स्टीन फाइल्स हजारों पन्नों के दस्तावेज का एक संग्रह है, जो एप्स्टीन और उसकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल के खिलाफ यौन तस्करी से जुड़ी दो आपराधिक जांचों से संबंधित है। इनमें यात्रा रिकॉर्ड, रिकॉर्डिंग और ईमेल शामिल हैं और 2019 में हिरासत में एप्स्टीन की मौत के बाद से ये लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।
