बाराबंकी : बेमौसम बारिश संग गिरे ओले, फसलों को नुकसान
बाराबंकी, अमृत विचार। दिनोदिन गर्म होते जा रहे मार्च माह के मध्य में मौसम ने अचानक ऐसी करवट ली कि एसी, पंखे तक बंद हो गए। शुक्रवार सुबह दस बजे बादलों ने तेज हवा के साथ जमकर बारिश की तो जिले में कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई। बेमौसम बारिश का विपरीत असर फसलों पर पड़ा, सरसों को नुकसान तो हुआ ही पहले ही बेदम आलू ने किसानों को रुला डाला।
गुरुवार तक दिन का तापमान 35 डिग्री पार कर गया था। दिन में झुलसा देने वाली गर्मी तो रात घिरते ही हल्की ठंडक के एहसास के बीच मौसमी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ रही थी। शुक्रवार की सुबह तक सामान्य रहे मौसम के तेवर अचानक बिगड़ गए, दस बजे तक आसमान पर छाए काले बादलों से दिन में ही अंधेरा हो गया।
वहीं तेज हवा के साथ जमकर बारिश होने लगी। लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। करीब आधे घंटे बाद बारिश थमी पर रुक रुक कर छीेंटे पड़ते रहे, इस बदलाव का असर यह हुआ कि घर में चल रहे पंखे एसी तक बंद हो गए। बारिश के बाद मार्गाें पर कीचड़ तो नालियों का पानी उफना गया।

हालांकि गर्मी से परेशान शहरियों को बारिश से खासी राहत मिली। ग्रामीण इलाकों में बारिश के साथ जमकर ओलावृष्टि हुई, इसके साथ चली तेज हवाओं ने मौसम पलट कर रख दिया। इस बारिश के असर से यातायात भी नहीं बच सका। दिन में ही वाहनों की हेडलाइट जल गई तो बेहद कम रफ्तार में गाड़ियां दूरी तय करती नजर आईं। देवा क्षेत्र उच्च विद्यालय विद्यालय मुजीबपुर परिसर के पास शुक्रवार सुबह आकाशीय बिजली गिरने से विद्यालय में बिजली उपकरण जल गए और विद्यालय में परीक्षा दे रहे छात्रों में हड़कंप मच गया प्रधानाध्यापिका मीरा सिंह ने बताया कि घटना के बाद बच्चे काफी डर गए थे।
बारिश, ओलावृष्टि से चिंतित हुए किसान
बेमौसम बदलाव के चलते हुई बारिश किसानों के लिए किसी आफत से कम नहीं रही। सरसों और आलू की फसलों को लेकर किसान वर्ग में गहरी चिंता व्याप्त हो गई है। जिले के अधिकांश क्षेत्रों में इस समय सरसों की फसल कटाई के अंतिम दौर में है। सैकड़ों किसानों ने पहले ही अपनी फसल काटकर उसे खेतों और खलिहानों में सुखाने के लिए रख दिया था।
बेमौसम बारिश उनकी मेहनत पर पानी फेरती दिखी। जानकारों के अनुसार, कटी हुई सरसों के भीगने से उसकी गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता है। यही हाल आलू का रहा, अभी भी तमाम किसानों का आलू खुदना बाकी है लेकिन बारिश से किसानों के कदम ठिठक गए। वहीं भीगी मिट्टी में दबे आलू के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
