Uttrakhand: जब राजनाथ ने पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी कह कर दिलाया जोश
हल्द्वानी, अमृत विचार। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एमबी इंटर कॉलेज मैदान से उत्तराखंड सरकार की चार साल की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल भी फूंक दिया। उन्होंने राज्य की जनता से दो तिहाई बहुमत मांगकर राज्य में डबल इंजन सरकार की हैट्रिक का आह्वान किया।
वैसे तो यह कार्यक्रम राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने का था लेकिन रक्षा मंत्री ने इसमें चुनावी शंखनाद कर दिया है। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं। उन्होंने कहा कि सीएम धामी ने चार वर्ष सफलतापूर्वक पूरे किए हैं तो भाजपा सरकार के नौ वर्ष पूरे हुए हैं। इन नौ वर्षों में उत्तराखंड में जितनी तेजी से विकास हुआ है, यह किसी ने कल्पना नहीं की थी कि उत्तराखंड एक छोटा सा राज्य जहां संसाधन, धन का अभाव है वह आगे बढ़ पाएगा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि, तपोभूमि के साथ वीरभूमि है। यह जब भी देश की सीमाओं की सुरक्षा की बात आती है, उत्तराखंड के भाई बहन बलिदान में भी पीछे नहीं रहते हैं। पीएम के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी यदि काम आना चाहिए तो पहाड़ व देश के लिए काम आना चाहिए।
हल्द्वानी में पहले नहीं उमड़ी इतनी भीड़
उन्होंने कहा कि वह हल्द्वानी में आज जो भीड़ उमड़ी है इससे पहले कभी नहीं देखी गई है। उन्हें विश्वास है कि भाजपा के नेतृत्व में दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि देश के सामने आदर्श राज्य के रूप में उत्तराखंड ने खुद को प्रस्तुत किया है। जनता से आह्वान किया कि इससे भी बेहतर राज्य बनाना चाहते हैं तो भाजपा को भरपूर समर्थन प्राप्त होना चाहिए।
यादें ताजा कर उत्तराखंडवासियों से जोड़ा रिश्ता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड आंदोलन की पुरानी यादों को साझा करते हुए देवभूमिवासियों से रिश्ता जोड़ा। साथ ही अपनी खुशी व दर्द भी साझा किया। रक्षामंत्री ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी जब भारत के प्रधानमंत्री थे, वर्ष 2000 में इसका गठन हुआ था। तब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्हीं के कार्यकाल काल के दौरान ही उत्तर प्रदेश का विभाजन हुआ था और उत्तराखंड जैसे एक नए राज्य का सृजन हुआ था। वह 10-12 दिन के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंडवासियों के स्वभाव से भली भांति परिचित हैं क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक उत्तराखंड में काम किया। उत्तराखंड के लोग स्वभाव से बहुत सौम्य होते हैं लेकिन जब भी जरूरत जब पड़ी तो स्वभाव से सौम्य होने के बावजूद इनके स्वभाव में पर्वत सी अटलता देखने को मिलती है, यह हिन्दुस्तान के किसी भी राज्य में यह अटलता देखने को नहीं मिलती है। यह देवभूमि आस्था, अध्यात्म और हमदर्द की भूमि है यहां की पवित्र धरती और यहां का कण-कण अध्यात्मिक चेतना को एक नई ऊर्जा देने का काम करता है।
