Bareilly: अंगूठा चूसने की आदत बच्चे के मौखिक स्वास्थ्य पर डाल सकती है नकारात्मक प्रभाव

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। बच्चों में अंगूठा चूसना एक सामान्य आदत है, विशेषकर शिशु अवस्था में। यह उन्हें सुरक्षा और सुकून का एहसास कराता है, लेकिन जब यह आदत 3-4 वर्ष की आयु के बाद भी जारी रहती है तो यह बच्चे के मौखिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के विशेषज्ञों ने ऐसी आदत होने पर बच्चों को क्या दिक्कतें हो सकती हैं, इसके बारे में जानकारी दी है।

अंगूठा चूसने के कारण और दुष्परिणाम
यह आदत अक्सर बच्चे के तनाव, ऊब, नींद की जरूरत या भावनात्मक असुरक्षा के कारण विकसित होती है। कई बार यह केवल एक आदतन क्रिया बन जाती है, जिसे बच्चा अनजाने में बार-बार करता रहता है। लंबे समय तक अंगूठा चूसने से कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसमें दांतों का आगे की ओर झुक जाना, ऊपरी और निचले दांतों के बीच गैप, जबड़ों की असामान्य वृद्धि, बोलने में कठिनाई, चेहरे की बनावट में बदलाव हो सकता है। यदि समय रहते इस आदत को नहीं रोका गया तो आगे चलकर ऑर्थोडॉन्टिक उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। बता दें कि इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज की ओर से बच्चों को दंत रोगों से बचाव के लिए जागरूकता माह चलाया जा रहा है।

पेडोडॉन्टिस्ट की भूमिका
पेडोडॉन्टिस्ट (बाल दंत विशेषज्ञ) इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे बच्चे और माता-पिता को सही मार्गदर्शन देते हैं। व्यावहारिक तकनीकों से आदत छुड़ाने में मदद करते हैं। जरूरत पड़ने पर आदत छुड़ाने वाले उपकरण का उपयोग करते हैं। बच्चे के दांतों और जबड़ों की नियमित जांच कर उनकी सही वृद्धि सुनिश्चित करते हैं।

अभिभावकों की भूमिका भी अहम
माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे को डांटने या सजा देने के बजाय प्यार और धैर्य से समझाएं। बच्चे को व्यस्त रखने, सकारात्मक प्रोत्साहन देने और उसकी भावनात्मक जरूरतों को समझने से इस आदत को आसानी से छोड़ा जा सकता है। हालांकि, अंगूठा चूसना एक सामान्य आदत है, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह गंभीर दंत समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए, सही समय पर पेडोडॉन्टिस्ट से सलाह लेना और बच्चे को सही दिशा देना अत्यंत आवश्यक है।

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